मनुष्य को शांत भाव व तटस्थ रहकर जीना चाहिए आर्यिका विज्ञाश्री

धर्म

मनुष्य को शांत भाव व तटस्थ रहकर जीना चाहिए आर्यिका विज्ञाश्री


निवाई
श्री शांतिनाथ दिगम्बर अग्रवाल जैन मंदिर निवाई में परम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी के पावन सानिध्य में चल रहे 48 दिवसीय श्री जिनसहस्त्रनाम महामंडल विधान मैं प्रातः अभिषेक शांति धारा अष्टद्रव्यों से पूजा के बाद विधानमंडल की पूजा हुई जिसमें हुकमचंद जैन प्रेस वाले एवं दिनेश जी झिलाय वालों ने पूजा अर्चना कर पुण्य प्राप्त किया।

जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत करवाया की कार्यक्रम के अंतर्गत आर्यिका श्री ने भरी धर्म सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि पानी को कसकर पकड़ोगे तो हाथ से छुट जायेगा, उसे रहने दो वह अपना रास्ता खुद बना लेगा। कभी कभी जब परिस्थितियां समझ में न आये तों जो कुछ जीवन में घटित हो रहा है उसे शांत भाव व तटस्थ होकर बस देखना चाहिये। समय आने पर जीवन अपना मार्ग खुद बना लेगा। अतः मनुष्य को जीवन में आत्म विश्वास रखते हुए स्वाभिमान से जीना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी

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