बुढ़ापा बोझ नहीं..बल्कि अनुभवों का खजाना है..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
परतापुर राजस्थान
अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हु कहा कि बड़े बुजुर्ग अक्सर सोचते हैं कि अब उनका शरीर ढल गया है, समय बीत गया है, इसलिए वे घर-परिवार के लिए बोझ बन गए हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। जब शरीर कमजोर होता है, तब आत्मा और अनुभव और अधिक मजबूत हो जाते हैं।
बड़े बुजुर्गों के पास जो अनुभव और सीख होती है, वह हजारों किताबें पढ़ने से भी नहीं मिलती। उनके चेहरे की हर झुर्री में वर्षों का अनुभव छिपा होता है — बस उसे पढ़ने, समझने और अपनाने की आवश्यकता है। इसलिए *बड़े बुजुर्गों से एक निवेदन है कि वे अपने पोते-पोतियों और बच्चों को केवल गिफ्ट ही नहीं, बल्कि अपने जीवन के अनुभव भी साझा करें।






60 वर्ष की आयु के बाद अपने घर को तपोवन और साधना स्थली समझें। जब बच्चे अपनी-अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाएँ, तब उनसे अधिक अपेक्षाएँ न रखें। छोटी-छोटी बातों पर क्रोध न करें, बल्कि क्रोध के स्थान पर प्रेम बाँटें, शिकायत की जगह धन्यवाद दें, और डिमांड की जगह आशीर्वाद प्रदान करें।
प्रतिदिन रात को सोने से पहले अपने माता-पिता, गुरु और परमात्मा का धन्यवाद करें*। साथ ही, तीन बातों को याद करें —
(1) माता-पिता के उपकार,
(2) गुरु जनों के सत्संग से मिली कोई अच्छी सीख, और
(3) अपने कुल, धर्म और जीवन के लिए परमात्मा के प्रति कृतज्ञता।
ये तीन कार्य आपके मन की शांति, चेहरे की प्रसन्नता और जीवन को अकेलेपन से सदैव मुक्त रखेंगे…!!!
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
