दीक्षा से मंच, लंच,ड्रेस और एड्रेस बदल जाता हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

दीक्षा से मंच, लंच,ड्रेस और एड्रेस बदल जाता हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

जयपुर 

जयपुर देश का एकलौता नगर जहा आचार्य श्री ने मुनि,आर्यिका, ऐलक,क्षुल्लक ओर क्षुल्लिका दीक्षा दी।।सलूंबर निवासी 69वर्षीय 7 प्रतिमाधारी श्री हुकमी चंद जी ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षा ग्रहण कर क्षुल्लक श्री प्रतिज्ञा सागर जी बने एवं श्रीमती कांता सलूंबर क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण कर श्री प्रदीप्त मति जी बनी । मंच पर आचार्य श्री एवं अन्य साधुओं ने दीक्षार्थी के केश लोच किए। राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने सिद्ध हस्त कर कमलों से मस्तक ओर हाथों पर जैनत्व दीक्षा संस्कार किये। दीक्षा पश्चात नूतन क्षुल्लक श्री प्रतिज्ञा सागर को एवं क्षुल्लिका श्री प्रदीप्त मति जी को पिच्छी, कमंडल, शास्त्र , कपड़े ,माला भेंट करने का सौभाग्य विनोद ,नवीन भारती प्रकाश मालवीय हेमा कमलेश आदि पूर्व परिजनों को प्राप्त हुआ।इस अवसर परआचार्य श्री वर्धमान सागरजी ने धर्म सभा में बताया कि दीक्षा का अर्थ है इच्छाओं का दमन दीक्षा याने लंच और मंच का बदल जाना दीक्षा मतलब ड्रेस और एड्रेस का परिवर्तन हो जाना विचारों में क्रांति को दीक्षा कहते हैं आमूलचूल परिवर्तन को दीक्षा कहते हैं दीक्षा पूर्व संस्कार को तोड़ने का नाम है ,अलौकिकता से दूर आध्यात्मिक नगर के नजदीक रहना दीक्षा है ।दीक्षार्थी यह साधु परिणामों को संभालते हैं।मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने बताया कि जयपुर देश का इकलौता नगर है जहां से मुनि ,आर्यिका ऐलक,क्षुल्लक ओर क्षुल्लिका सभी दीक्षा दी हैं आचार्य श्री ने इसके पूर्व 5 दीक्षा जयपुर में दी। कुल 125 दीक्षा में 43 मुनि ,46आर्यिका 2 ऐलक, 19 क्षुल्लक तथा 15 क्षुल्लिका दी हैं।जयपुर में 7 वी दीक्षा हुई।10 फरवरी 2000 को मुनि श्री देवेंद्र सागर जी और मुनि श्री देवेश सागर जी को नेमी सागर कॉलोनी में मुनि दीक्षा दी थी आपने 10 नवंबर 1999 को ऐलक श्री नमित सागर जी को दीक्षा दी,श्री गुप्ती मति जी को 7 मार्च 2016 बड़के बालाजी में आर्यिका दीक्षा दी तथा श्री अचल मति माताजी को 10 नवंबर 1999 को जयपुर में क्षुल्लिका दीक्षा दी आज 29 अप्रैल को क्षुल्लक श्री प्रतिज्ञा सागर जी को दीक्षा दी।इसके पूर्व दीक्षार्थियों के केशलोच हुए परिजनों के नेत्रों में खुशी और दुख दोनों झलक रहा।मंगल स्नान कर दोनों ने श्री जी के दर्शन कर पंचामृत अभिषेक कर आचार्य श्री से आशीर्वाद लिया। ध्वजारोहण के बाद मंच पर दोनों दीक्षार्थियों ने आचार्य संघ परिजनों,समाज से क्षमा याचना की। दीक्षा के पूर्व सभी आचार्यों को अध्र्य समर्पित किए गए।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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