दूसरों की सफलता की कहानी..आपकी सफलता की कहानी नहीं बन सकती..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
परतापुर बांसवाड़ा
आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित कियाउन्होंने कहा हमने कभी उनके जैसे बनने की कोशिश नहीं की, क्योंकि उनके जैसे बनने में बनावटीपन है, नकल है — सब कुछ उधार है। भगवान ने हमें आठ किलो का दिमाग गोबर से नहीं, बल्कि कलाकंद से भरकर दिया है। अब अगर हम ही उसे बेकार कर दें, तो इसमें परमात्मा का क्या दोष?
हर इंसान में कुछ अच्छी आदतें होती हैं, तो कुछ बुरी भी। ये बुरी आदतें हमारी सफलता में बाधक बन सकती हैं। बुरी आदतें सिर्फ खाने-पीने या किसी व्यसन तक सीमित नहीं होती — ये ज्यादा बोलने की, गुस्सा करने की, खराब व्यवहार की, चुगली करने की या लोगों को लड़ाने-भिड़ाने की भी हो सकती है।





यदि छोटी-सी बुरी आदत पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो यह आपकी व्यक्तित्व और प्रबंधन क्षमता पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। एक छोटी-सी बुरी आदत भी आपके जीवन की उन्नति में बाधा बन सकती है।
इससे बचने के लिए चार बातें—
बात-बात पर बहस न करें, न लड़ाई-झगड़ा करें, न किसी की बुराई करें। मन को सरल रखें और समस्याओं का शांतिपूर्वक समाधान करें।
भावावेश में आकर कोई निर्णय न लें। अपनी असफलताओं पर विचार करें — क्या खोया, और क्यों मन की शांति व चेहरे की प्रसन्नता चली गई?
दूसरों पर दोषारोपण न करें। अपनी असफलताओं से सीखें, वर्तमान स्थिति को समझें और उससे बेहतर करने का साहस रखें।
अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कदम बढ़ाते रहें। आत्मविश्वास को कभी कमजोर न होने दें…!!!
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
