मेरा पहला जन्म 1971में मां के पेट से हुआ तो दूसरा जन्म आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज के हाथों से 1999 मे हुआ संभव सागर जी 

धर्म

मेरा पहला जन्म 1971में मां के पेट से हुआ तो दूसरा जन्म आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज के हाथों से 1999 मे हुआ संभव सागर जी

विदिशा

“दुनिया की आपाधापी से जब व्यक्ति तंग हो जाता है,तो वह प्रभु और गुरु की शरण में पहुंचता है” उपरोक्त उदगार निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108संभवसागर महाराज ने रविवारीय धर्म सभा में व्यक्त किये।

 

 

 

प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनिसंघ स्टेशन जैन मंदिर में विराजमान है,उन्होंने समग्र पाठशालाओं के बच्चों को संबोधित करते हुये कहा कि बच्चा जब मां की गोद में होता है,तो अपने आपको सुरक्षित महसूस करता है उन्होंने कहा कि “अम्मा” प्राकृत भाषा का शब्द है तथा उसमें से अ का लोप होकर ही मां शब्द बना है।

 

उन्होंने कहा कि जैसे जन्म के संस्कार होते है,उसी प्रकार दीक्षा के संस्कार होते है जैसे मां की गोद में बच्चा अपने आपको सुरक्षित महसूस करता है,उसी प्रकार एक शिष्य गुरुदेव के रहते अपने आपको सुरक्षित महसूस करता है,गुरु मां के समान ही अपने शिष्य का लालन पालन एवं पोषण करते है, उन्होंने कहा कि उनका पहला जन्म सन्1971 में मां के पेट से हुआ तो दूसरा जन्म आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज के हाथों से नेमावर में 22 अप्रेल 1999 को हुआ उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने हमेशा अपने शिष्यों का मां के भांति ख्याल रखते थे। उन्होंने हमेशा संघ को महत्व दिया जब कभी भी कोई समस्या सामने आती थी तो वह खुद निर्णय न लेकर संघ के साधुओं पर छोड़ देते थे और कहते थे कि में भी संघ का ही एक सदस्य हुं,यह उनका बड़प्पन था।

 

 

मुनि श्री ने कहा कि जैसे गर्मी में ताप से घबराकर व्यक्ति ठंडक जगह को देखता है,उसी प्रकार संसारी प्राणी संसार के जन्म जरा और मृत्यु के ताप से घबरा जाता है,तो व्यक्ती प्रभु और गुरु की शरण में पहुंचता है,तो आचार्य गुरुदेव उसको आश्वस्त करते है जैसे एक छोटा बालक को कितनी भी पीड़ा हो वह मां की गोद में जाकर उस पीड़ा को भूल जाता है।

 

 

मुनि श्री ने कहा कि जैसे बचपन में मां की गोद सबसे अधिक सुरक्षित स्थान होता है,उसी प्रकार वीतराग दि.जैन साधु उस मां के ही समान निश्चल एवं विश्वास के योग्य दर्पण के समान है उन्होंने कहा कि यह युग के आदि में भगवान आदिनाथ के समय से चला आ रहा है और उन्होंने विदिशा वालो की तारीफ करते हुये कहा कि आप लोगों ने तीनों दिवस जिस विश्वास के साथ कार्यक्रम में भाग लिया और सभी लोगों ने ठंड को नहीं देखा और जैसा गुरु का आदेश हुआ और काम पर लग गये। उन्होंने कहा कि विदिशा वालों ने सभी रिकार्ड तोड़ दिये।

 

 

गुरु के आदेश को हमेशा शिष्य करने के लिए तैयार रहता है, मुनि श्री

 

मुनि श्री ने कहा कि आपके यहा पर ढाई माह से ऊपर हो गया लेकिन मालुम ही नहीं पड़ा। जैसे सैना हमेशा तैयार रहती है उसी प्रकार गुरु के आदेश को हमेशा शिष्य मानने के लिये तैयार रहता है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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