मुनिश्री संथानसागर महाराज के 5उपवास पूर्ण समस्या में यदि समता कर लें तो समस्या तपस्या बन जाती है संथानसागर महाराज
एलोरा
पूज्य मुनि श्री 108 संथानसागर महाराज ने अपने उद्बोधन में समस्याओं में समता धारण करने की सीख दी।
उन्होंने कहा गुस्से में भोजन का त्याग करना बहुत आसान है लेकिन गुस्से का त्याग करना बहुत कठिन है। संसार में ऐसा कोई स्थान नहीं है जहां पर समस्या ना हो समस्याएं तो पल-पल आती हैं। लेकिन उन समस्याओं में जो समता धारण कर ले उसके लिए यह समस्याएं तपस्या बन जाती है।

उन्होंने कहा कि तप कहा केसे कब करे यदि इस पर ध्यान रखेंगे तो सही दिशा में तप कहलाएगा। एक उदाहरण के माध्यम से कहा कि नहीं तो मात्र बर्तन ही तपाना होगा।




दूध से घी की प्राप्ति तो होगी ही नहीं। महाराज श्री ने तीन प्रकार के तपो के विषय में बताया शारीरिक तपवाचिक तप एवं मानसिक तप तन मिला तुम तप करो करो कर्म का नाश, रवि शशि से ज्यादा है तुममें दिव्य प्रकाश।
पूज्य मुनिश्री संथानसागर महाराज की पांच उपवास की साधना पूर्ण हो चुकी है। उन्होंने कार्तिक माह की अष्टानिका से उपवास शुरू किए। पूज्य महाराज श्रीसंघ का 26 नवंबर को पिच्छिका परिवर्तन होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
