NCERT की कक्षा 9 की संस्कृत की नई पुस्तक शारदा में णमोकार महामंत्र शामिल हुआ। यह जैन समाज की लिए गौरव का विषय है।
जैन धर्म की प्रभावना में एक नया आयाम स्थापित हुआ है जो जैन धर्म को समझने जानने में एवम उसकी प्रभावना में सार्थक कदम होगा।
जी हा NCERT की कक्षा 9 की नई संस्कृत पाठ्यपुस्तक “शारदा” में ‘नमो अरिहंताणं’ (णमोकार महामंत्र) को शामिल किया गया है, जो जैन समाज के लिए एक अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण है। यह अध्याय भगवान ऋषभदेव स्वामी के जीवन और प्राकृत भाषा के संरक्षण पर आधारित है, जो छात्रों को महापुरुषों के आदर्शों से प्रेरणा देगा।
इस समावेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
पाठ्यपुस्तक: NCERT कक्षा 9 संस्कृत ‘शारदा’ (नई पुस्तक)।
अध्याय: “नमो अरिहंताणं” (णमोकार महामंत्र)।
महत्व: यह जैन दर्शन, प्राकृत भाषा के संरक्षण और नैतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में सहायक होगा।
उद्देश्य: छात्रों को जैन धर्म के मूलमंत्र और ऋषभदेव स्वामी के जीवन आदर्शों से परिचित कराना।

यह पहल शैक्षणिक पाठ्यक्रम में भारतीय संस्कृति और धर्मों के समावेश के प्रति सकारात्मक बदलाव को दर्शाती है।
नमोकार महामंत्र सर्व मंत्रों का दाता है जिसका स्मरण करने से पापों का नाश पुण्य का बंध होता है इस महामंत्र में पंच परमेष्ठि को नमस्कार किया गया है।
जिसमें 5 पद 35 अक्षर 58मात्राएं
पंच परमेष्ठि का आशय जो परम पद में स्थित हो
प्रथम पद में अरिहंतो को नमस्कार किया गया
द्वितीय पद में सिद्धों को नमस्कार किया गया
तृतीय पद में आचार्यों को, चतुर्थ पद में उपाध्यायो को नमस्कार किया गया पंचम पद में लोक में जितने में भी सर्वसाधु है उन्हें नमस्कार किया गया है।
वर्तमान परिप्रेक्ष में अहिंसा शांति की आवश्यकता है इसको पाठ्यक्रम में शामिल करना सार्थक पहल कही जा सकती है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
