आचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर महाराज के अवतरण दिवस अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागर महाराज की शब्द रूपी विनयांजली
पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता दिगम्बराचार्य श्री पुष्पदन्त सागरजी गुरूदेव के 71 वे जन्मोत्सव एवं नववर्ष-2025 की पावन बेला पर..मेरी सकल संघ सहित अनन्त शुभासंशाये और प्रणाम नमन वन्दन
हे जैन जगत के महामार्तण्ड! हे जिन शासन के प्रभावक धूरिकीर्तिनीय धाम! हे संयम साधना वीर्य करूणा के अगाध, अपार सागर — अनुत्तर महान परोपकारी गुरूदेव के चरणों में अन्तर्मन से त्रिबार भाव वन्दना करता हूँ।

हे आत्म ऊर्ध्वारोहण के अप्रमत्त साधक,चारित्र की उजली चादर की अम्ल धवल, ज्योत्स्ना से आलोकित, हे दैदीप्यमान दिवाकर, अन्धेरों को उजालते हुये युग को अमृत निधि बांटने वाले,, हे परम दिगम्बर सन्यासी! आप उन विरली विभूतियों में से एक हैं, जिन्हें प्रकृति ने अपरमित मेहनत और कशिश से तराशा है, श्रमशीलता के सतत् अभ्यास से आपने हर स्वार्थ का विसर्जन किया है; सहिष्णुता से हर कष्ट को हँसकर सहा और सम्पूर्ण मानव जाति के लिए बन गये उपयोगी।





हे अध्यात्म के महास्रोत! आपकी वात्सल्यमयी दृष्टी आश्वस्त करती मधुर मुस्कान, आशीर्वाद मुद्रा में उठे दोनों हाथ, भक्त-अभक्त को, निन्दक-प्रशन्सक, सभी को परम शान्ति का अनुभव कराते हैं।
हे युग नायक! आपकी वचन सिद्धि सम्यक्त्व की साधना का जन चेतना को ऊर्ध्वारोहण करवाती है।
हे कल्याण कल्पतरू गुरूदेव!बहुजन हितकर चर्या की साधना करते हुये, धर्म ध्यानी, अनुशासन प्रिय, तीर्थंकर के लघु नन्दन गणाचार्य श्री पुष्पदन्त सागरजी महाराज के चरणों में सिद्ध भक्ति, श्रुत भक्ति, आचार्य भक्ति सहित त्रि-फेरी करते हुए भाव वन्दना प्रणाम करता हूँ।
हे वीतरागता के मूर्तिमान गुरूदेव* नववर्ष 2025 आपकी अहैतुकी कृपा चतुर्दिग विस्तीर्ण करने का साक्षी बने, आपकी आत्म विशुद्धि के रत्नत्रयी संप्रवर्तन द्रुतता से वर्धमान होते रहें,, इस हेतू आपके पादपद्मों में…
कोटिशः नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु
अन्तर्मना
1 जनवरी 2025*। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त आलेख
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
