हर मास एक उपवास से..बढ़े आत्म विश्वास..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज 

धर्म

हर मास एक उपवास से..बढ़े आत्म विश्वास..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज 

बांसवाड़ा राजस्थान

अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने सुपार्श्वनाथ चैत्यालय संघवी परिवार राजराजेश्वर कोलोनी में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा मनुष्य के शरीर में सभी बीमारियों की जड़ है — मध्य प्रदेश यानि [ पेट ]। इसलिए उसे समय-समय पर विश्राम देना आवश्यक है — और इसके लिए हर मास एक उपवास करना एक उत्तम उपाय है।

 

 

 तन की भूख – भोजन,

 मन की भूख – संकल्प

 और चेतना की भूख उपवास।

 मनुष्य को स्वस्थ प्रसन्न रहने के लिए, यूं तो महिने में कम से कम 4 उपवास करना चाहिए। यदि चार उपवास करना सम्भव नहीं हो तो कम से कम एक उपवास तो करना ही चाहिए।

 

हर मास एक उपवास करने से –पाचन तन्त्र को विश्राम मिलता है और शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं। कैलोरी की सीमित मात्रा में सेवन करने से शरीर अपनी ऊर्जा भण्डार [फैट] का उपयोग करता है, जिससे वजन कर कम करने में मदद मिलती है। शरीर का फैट घटाने में सहयोगी बनता है।

 

 

 नियमित अन्तराल पर उपवास करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है तथा शरीर की कार्यक्षमता बेहतर होती है।कोलेस्ट्राॅल को कम करने, रक्त चाप, बी.पी को नियंत्रित करने और इन्शुलिन सम्वेदनशीलता को बढ़ाकर मधुमेह के खतरे को कम करने में सहायक सिद्ध होता है।

 

 तन और मन को स्वस्थ प्रसन्न करता है एवं मन की एकाग्रता को बढ़ाता है। आत्म नियन्त्रण में वृद्धि करता है।जोड़ो के दर्द, अर्थराइटिस और शरीर में जकड़न को कम करने में कारगर सिद्ध होता है। किडनी, लीवर को फिट रखता है। हृदय रोग का खतरा कम होता है, शरीर ताजगी और ऊर्जा से सराबोर रहता है। मानसिक सोच, एवं मन की एकाग्रता बढ़ती है। चर्म रोग की समस्या जैसे – सफेद दाग, पिंपल्स आदि नहीं होते हैं। नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है। 

 चेतना का आध्यात्मिक विकास होता है। मन शान्त रहता है और चेहरा प्रसन्नता से भर जाता है।इसलिए –व्रत एक – लाभ अनेक का आधार है..अपनाएं – हर मास एक उपवास..!!! 

 

नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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