पूज्य मुनि श्री अविचल सागर महाराज के सानिध्य में 90 वर्षीय श्रीमती सरस्वती देवी जैन का सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण
झांसी
चतुरयाना निवासी श्री त्रिलोक चंद जैन, श्री भरत चंद जैन एडवोकेट, श्री राजकुमार जैन एवं श्री सुधीर जैन की पूज्य मां श्रीमती सरस्वती देवी जैन का 90 वर्ष की आयु में आज शाम को सल्लेखना पूर्वक समाधिमरण हुआ।
जेसी इनकी भावना थी वैसा ही उनका अंत जीवन उन्नत बना। पूज्य माताजी के जीवन की यही अंतिम अभिलाषा थी कि जब भी मेरा अंतिम मरण हो तो वह मृत्यु हो गुरु चरणों में ही हो। वैसा ही उनके अंतिम क्षणों में हुआ है। इन्होंने समता पूर्वक चारो प्रकार के आहार का त्याग कर मानव देह को धन्य करते हुए पूज्य मुनि श्री 108 अविचल सागर जी महाराज के सानिध्य में समाधि मरण को प्राप्त किया।
जीवन के इन अंतिम समय में पूज्य मुनि श्री 108 अविचल सागर जी महाराज ने उन्हें संबोधन देते हुए समाधिमरण का पाठ श्रवण कराया। जीवन के अंतिम क्षणों में प्रदीप जैन आदित्य भी इन अंतिम क्षणों में वहा मौजूद रहे। और सपरिवार वहां बैठकर णमोकार मंत्र का पाठ किया।
निश्चित रूप से यह एक महान आत्मा ही थी जो जीवन के अंतिम क्षणों में दिगंबर संत का सानिध्य मिला। और वह भी संबोधन के साथ निश्चित रूप से इन्होंने उत्कृष्ट मरण को प्राप्त किया है।
हर व्यक्ति को यही भावना करनी चाहिए।
तेरी छत्रछाया भगवन मेरे सर पर हो
मेरा अंतिम मरण समाधि तेरे दर पर होय भगवान और गुरु का सानिध्य जीवन के अंतिम क्षणों में यदि प्राप्त होता है तो वह उत्कृष्टता की ओर अग्रसर होते हुए। देवत्व की प्राप्ति करता है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपॉर्ट
