वक्त और बदलते दौर के रिश्तों में..खुद को बदलना ही सबसे बड़ी समझदारी है..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
बांसवाड़ा राजस्थान
अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ बांसवाड़ा के बाहुबली कॉलोनी में विराजमान हैं उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो रहें हैं उसी श्रुंखला आज उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा। जैसे पेड़ की टहनी पर बैठा पक्षी कभी टहनी टूटने से नहीं डरता क्योंकि उसे विश्वास टहनी पर नहीं, अपने पंखो पर होता है। जीवन का यह कड़वा सच है कि लोग आपको तब तक याद करते हैं, जब तक आपकी सांसे और उनके स्वार्थ सिद्ध हो रहे हैं। स्वार्थ सधते और स्वांसे रूकते ही करीबी, अपने सगे सम्बन्धी, रिश्तेदार, दोस्त-यार दूर चले जाते हैं।
यह सच वैसा ही है जैसे तेल की एक बून्द पर, लाखों टन पानी गिरने के बाद भी पानी, तेल की बून्द के अस्तित्व को मिटा नहीं पाती। अरे बाबू! हम हमेशा यही नहीं सोच सकते, ना चुन सकते कि हमारा कौन कितना साथ और सहयोग करेगा-? लेकिन हम उन सभी स्थितियों से सीख बहुत कुछ सकते हैं। अनुभव से सीख कर जीओगे, तो कभी अपनों के सामने लाचार नहीं बन पाओगे।

सबके जीवन में एक समय ऐसा आता है, जब स्वयं का मन स्वयं से कहता है – संसार में परमात्मा और धर्म के अलावा कोई भी अपना नहीं है। इसलिए –जीवन के हर सच का सामना हिम्मत से करो। जो है सो है…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
