आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया गया महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया 39 वा मुनि दीक्षा महोत्सव 

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आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया गया महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया 39 वा मुनि दीक्षा महोत्सव 

उदयपुर उदासीन आश्रम अशोकनगर उदयपुर में आचार्य भगवन् श्री विद्यासागर जी महामुनिराज से दीक्षित आचार्य भगवन् 108श्री आर्जवसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में 30 मार्च 2026 को भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में प्रातः काल महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें दीप आराधना भी की गई।

 

एवं दोपहर में आचार्य भगवन् श्री आर्जवसागर जी महामुनिराज के 39 वें मुनि दीक्षा दिवस एवं मुनि श्री महत् सागर जी एवं मुनि श्री सानंद सागर जी महाराज का दीक्षा दिवस बड़े ही धूम धाम से मनाया गया जिसमें उदासीन आश्रम कमेटी के सदस्यों द्वारा गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महामुनिराज का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन कर आचार्य भगवन् श्री आर्जवसागर जी महामुनिराज का पाद प्रक्षालन किया गया। उपरांत गुरु संघ के करकमलों में शास्त्र दान भी किया गया। जिसमें रामगंजमंडी नगर के मुनि भक्त श्री संजय मित्तल परिवार ने भी सौभाग्य प्राप्त किया।

 

इससे पश्चात पाठशाला के नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति भी दी गई। एवं संघस्थ बहिन ऋषिका दीदी दमोह के द्वारा आचार्य भगवन् की विशेष मांगलिक पूजन भी कराई गई।

 

 

 

 इसके पश्चात् गुरुदेव रचित नवीन कृति ज्ञान वर्धन काव्य एवं आर्जव वचनामृत सहित अन्य कृतियों लोक कल्याण विधान तथा भाव विज्ञान पत्रिका का भी विमोचन किया गया।

 

 

वर्तमान युग में बाहरी प्रगति तो बहुत हो रही है, परंतु आत्मिक शांति का अभाव दिखाई देता है। आचार्य श्री 

   

आचार्य भगवन् ने अपने मंगल प्रवचन के दौरान धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे वर्तमान शासननायक 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म के उपलक्ष्य में चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को यह पावन दिवस बड़े ही धूम धाम से पूरे भारत वर्ष में भक्ति भाव पूर्वक मनाया जाता है। यह पर्व अहिंसा, सत्य, और शांति का संदेश देता है। जिससे विश्वभर में हर्षोल्लास के साथ धर्म की अभूतपूर्व प्रभावना होती है। भगवान महावीर ने सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अस्तेय और ब्रह्मचर्य जैसे पाँच महाव्रतों का सिद्धांत दिया। आचार्य श्री ने और भी कहा कि वर्तमान युग में बाहरी प्रगति तो बहुत हो रही है, परंतु आत्मिक शांति का अभाव दिखाई देता है। भगवान महावीर का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है—“जियो और जीने दो” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जीवन दर्शन है। गुरु उपकार को व्यक्त करते हुए गुरुदेव ने कहा कि गुरु हमें केवल मात्र ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाते हैं। वे हमारे भीतर छिपे हुए श्रेष्ठ स्वरूप को जागृत करते हैं और हमें आत्मकल्याण की दिशा में प्रेरित करते हैं।

 

 

 

गुरु का सान्निध्य मिलना अत्यंत दुर्लभ है। जिनको गुरु मिलते हैं, उनका जीवन धन्य हो जाता है। परंतु केवल गुरु के समीप रहना ही पर्याप्त नहीं, उनके उपदेशों को जीवन में उतारना ही सच्ची गुरुभक्ति है।आचार्य श्री का संदेश है कि गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा तभी है, जब हम अपने जीवन को उनके आदर्शों के अनुरूप ढालें। 

 

 

 

श्री महेंद्र टाया ने बताया कि 

       इस पावन अवसर पर संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो गया। चारों ओर “वीर प्रभु की जय” एवं “गुरुदेव श्री आर्जवसागर जी की जय” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सम्पूर्ण वातावरण धर्ममय हो उठा हो।

भगवान महावीर के जन्म कल्याणक के इस पावन पर्व पर श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई एवं धर्म लाभ प्राप्त किया। श्रद्धालुजन प्रातः काल से ही पूजन, अभिषेक एवं विधान में लीन होकर अपने जीवन को धन्य बनाने का प्रयास करते दिखाई दिए।

आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के पावन पथ को आगे बढ़ाते हुए आचार्य श्री आर्जवसागर जी महामुनिराज ससंघ का यह सान्निध्य क्षेत्र के लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय रहा। उनके श्रीमुख से निकले मंगलमय वचनों ने उपस्थित जनसमुदाय के हृदय को स्पर्श कर आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान समाज के गणमान्य नागरिकों, श्रावक-श्राविकाओं एवं युवाओं की विशेष उपस्थिति रही। सभी ने मिलकर इस आयोजन को ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय बना दिया। आयोजन समिति द्वारा उत्कृष्ट व्यवस्था के कारण कार्यक्रम अत्यंत सुव्यवस्थित एवं गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ।

 

 

 

इस अवसर पर समाजजनों द्वारा यह भाव भी व्यक्त किया गया कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से नई पीढ़ी में संस्कारों का संवर्धन होता है तथा धर्म के प्रति आस्था और समर्पण और अधिक दृढ़ होता है।

अंत में मंगल आरती एवं बाहर से पधारे अतिथियों के स्वागत आदि के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। अंत में सभी लोग ने स्वामी वात्सल्य भोज ग्रहण कर समिति का आभार व्यक्त किया।

 

    संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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