अहिंसा केवल कर्म से ही नहीं, विचार और वाणी से भी होती है: भगवान महावीर स्वामीजब दुनिया हथियारों की भाषा बोल रही है, तब अहिंसा के शब्द ही उम्मीद
दुनिया में कई युद्ध चल रहे हैं। इसमें शामिल लोगों को भले ही लगता हो कि हिंसा को शक्ति से सबकुछ हासिल हो सकता है। असल में ऐसा नहीं है। सबसे ताकतवर अहिंसा है। जिन-जिन देशों ने युद्धों और संघर्षो से दूरी बनाई है, उन्होंने किसी न किसी स्वरूप में प्रगति को गले लगाया है। हम हिंसा को अक्सर मारपीट, अपराध या बड़ी घटनाओं से जोड़कर देखते हैं, लेकिन असल हिंसा हमारी रोजमर्रा की भाषा और सोच में छिपी है। घर में बोले गए कठोर शब्द, गुस्सा, सोसायटी में बढ़ता अहंकार, कार्यस्थल पर डर और अपमान ये सब हमारी जिंदगी की गुणवत्ता को कमजोर करते जाते हैं। यह स्टोरी बताती है कि हिंसा रोजमर्रा की आदतों का ही एक नतीजा है। साथ ही रिसर्च ये भी स्पष्ट करती है कि सम्मान और करुणा सिर्फ नैतिक मूल्य नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक स्थिरता और बेहतर प्रदर्शन के व्यावहारिक औजार हैं।
दुनिया में जहां अहिंसा वहां शिक्षा, खुशी और इनोवेशन
कोस्टा रीका:
सेना को भंग किया, अब दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में 1948 में युद्ध के बाद सेना भंग कर दी। फिर देश ने लोगों की शिक्षा, वेल बीइंग व स्वास्थ्य पर काम किया। आज देश वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में टॉप-5 में है।

जापान : हिंसक विकल्पों को त्यागा, अब दुनिया की टॉप-5 अर्थव्यवस्था में शुमार 1947 में तय किया अंतरराष्ट्रीय मसलों के हल के लिए हिंसक विकल्प नहीं अपनाएंगे। 60 के दशक में 10% रही विकास दर। अब दुनिया की टॉप-5 इकोनॉमी में।

भारतः दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ाया, अब चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
महावीर व बुद्ध के सिद्धांतों से दुनिया को अहिंसा की शिक्षा मिली और गांधी के अहिंसक मार्ग पर चलते हुए भारत ने आजादी पाई। हमने कभी किसी देश पर युद्ध नहीं थोपा। आज हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी हैं।
स्विट्जरलैंड: 200 साल से युद्ध से दूर200 वर्षों से युद्ध में भाग नहीं लिया। इनोवेशन पर जोर बढ़ा। सबसे ज्यादा पेटेंट दर्ज कराने वाले देशों में से एक। सुरक्षित देश के रूप में पहचान बनाई।
फिलीपींसः बिना बंदूक तानाशाही खत्म की
1986 में लोगों ने तानाशाही शासन का अहिंसक विरोध किया। आज उसका कॉल सेंटर उद्योग वैश्विक आउटसोर्सिंग बाजार में 16% हिस्सेदारी रखता है।
हिंसा आसान है, आदत है; अहिंसा अभ्यास है, साहस है…
घर में 60% तनाव समस्या से नहीं, शब्दों में कठोरता से होता है परिवारों में तनाव का 60% कारण संवाद में कठोरता है। बच्चों को डांटने से उनका आत्मविश्वास 30-40% घटता है। निगेटिव शब्द उनमें आक्रामकता बढ़ाते हैं।
सड़क पर होने वाले टकरावों में 70% की शुरुआत गुस्से से होती है
सड़क पर होने वाले कुल टकरावों में से 70% की शुरुआत गुस्से से होती है। आक्रामक ड्राइविंग करने वाले व्यक्ति दुर्घटना जोखिम को 4 गुना बढ़ा देते हैं।
कार्यस्थल पर शांति, सम्मान से आउटपुट 40% तक बढ़ जाता है
तिरस्कार वाले कार्यस्थलों में कर्मचारियों की भागीदारी 50% घट जाती है। वहीं अपमानजनक संवाद झेलने वाले नौकरी छोड़ने का निर्णय 3 गुना जल्दी लेते हैं। शांतिपूर्ण, सम्मानजनक संवाद टीम आउटपुट को 35-40% बढ़ाते हैं।
सोसायटी में संवाद से झगड़े कम
सोसायटी में 80% झगड़े पार्किंग, शोर, असहमति व तीखे शब्दों से शुरू होते हैं। वहीं संवाद करने वाली सोसायटी में कानूनी विवाद 40-45% कम होते हैं।
समाज में निगेटिव सोच से भरोसा 30% कम
समाज में फैली नकारात्मक सोच सामूहिक भरोसे को 30% तक कमजोर करती है। अफवाह, लेबलिंग और घृणात्मक भाषा सामाजिक ध्रुवीकरण तेजी से बढ़ाती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
