महाव्रत साधिका की साधना का प्रत्यक्ष प्रमाण -‘पार्श्वगिरी’ – हाड़ौती का नवोन्मेष तीर्थ*
अपने गुरु की समाधि से अब तक लगभग 30 वर्षों से अन्न का त्याग । पेड वर्कर नहीं केवल श्रावकों द्वारा तैयार चौके में ही लेती है आहार । एक उपवास तो सामान्य बात कभी तो दो उपवास के बाद होता है आहार ।
कभी तो केवल जल से होता है पारणा।अपनी क्रिया से कभी नहीं किया समझौता । बढ़ती उम्र के साथ बढ़ती जा रही है लक्ष्य के प्रति दृढ़ता ।

यह सब बताना इसलिए आवश्यक है कि हम श्रावक अपने श्रावकोचित कर्तव्यों का पालन नहीं करते हुए भी अपने इष्ट उद्देश्यों की पूर्ति में अक्षम रहते है पर यह एक ऐसी साधिका जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी महाव्रतों को पालन करके अपने गुरु की प्रतिष्ठा को वृद्धिंगत करते हुए अपनी तीर्थ कल्पना को आकार दिया…..

प. पू. अभिक्ष्ण ज्ञानोपयोगी समाधिस्थ आचार्य 108 श्री ज्ञानभूषण महामुनिराज की श्रेष्ठतम शिष्याप्राचीन जिन मंदिरों की उद्धारिका, आर्षज्योतिका, आर्यिका 105 श्री सुविवेकमति माताजी


*बीहड़ में भव्य तीर्थ निर्माण –
बूंदी से धनवा होकर 25 किमी, कोटा जयपुर रोड पर हिंडोली से 27 किमी बालग्राम में जब आज से 16 वर्ष पूर्व इस तीर्थ की नींव रखी गईं तब सब श्रावकों ने उपहास किया कि इस जंगल में कौन आयेगा पर शायद इस साधिका की दूर दर्शिता का अंदाजा किसी को नहीं होगा कि आज यह तीर्थ जंगल में मंगल का आभास देने वाला होगा।
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*स्वयं के बलबूते बनाया पूरा तीर्थ –
आज हमें अपने 2 मंजिला भवन में भी अकेले रहते किसी आहट पर डर का आभास हो जाता है, ऐसे में निर्जन बीहड़ में दिन रात अकेले रहकर संत निवास के साथ प्राकृतिक पहाड़ी पर नव जिन बिंबों को खड़ा करने तक की कष्टप्रद यात्रा जो केवल 1- 2 माह का काम नहीं बल्कि 16 वर्षों की अथक तपस्या का परिणाम है ।
अब निर्माण पूर्णता की ओर है और गुरु मां की अखंड साधना पर शिखर लगाते हुए श्री क्षेत्र पार्श्वगिरी के पंचकल्याण महोत्सव का सभी को इंतजार है। शीघ्र ही पंचकल्याणक की तिथियां उद्घाटित होंगी ।एक बार क्षेत्र दर्शन अवश्य करें ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
