खुश रहने का सीधा मंत्र – उम्मीद अपने आपसे रखो किसी और से नहीं। विज्ञाश्री माताजी

धर्म

खुश रहने का सीधा मंत्र – उम्मीद अपने आपसे रखो किसी और से नहीं। विज्ञाश्री माताजी
गुन्सी

श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ, गुन्सी (राज.) की पावन धरा पर साधनारत भारत गौरव गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी के ससंघ सान्निध्य में शांतिधारा करने का सौभाग्य लालचंद जैन रामनगर वाले निवाई एवं विश्वास बंसल नैनवां वालों ने प्राप्त किया। विज्ञातीर्थ क्षेत्र पर यात्रीगणों ने दर्शनों का लाभ प्राप्त किया।

 

 

पूज्य गुरु माँ अनशन व्रत अर्थात उपवास कर अपनी चर्या व साधना को उत्कृष्टता की ओर बढा रही है ।

 


प्रवचन सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म का सदुपदेश देते हुए माताजी ने कहा कि – दिल में बुराई रखने से बेहतर है कि नाराजगी जाहिर कर दो। जहां दूसरों को समझाना कठिन हो, वहां खुद को समझ लेना ही बेहतर है। खुश रहने का सीधा सा एक ही मंत्र है कि उम्मीद अपने आपसे रखो, किसी और से नहीं क्योंकि इस संसार में हर किसी को अपने ज्ञान का घमण्ड है परन्तु किसी को भी अपने घमण्ड का ज्ञान नहीं है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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