अहिंसा संस्कार पदयात्रा में आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज का तीखा वक्तव्य“निकले हैं वो लोग मेरी शख्सियत बिगाड़ने…”जिनके खुद के किरदार मरम्मत मांग रहे हैं..!”
नीमच,
अन्तर्मना आचार्य श्री 108प्रसन्न सागरजी महाराज एवं मुनि श्री 108 पियूष सागरजी महाराज ससंघ की अहिंसा संस्कार पदयात्रा दीक्षा भूमि परतापुर (बांसवाड़ा, राजस्थान) की ओर अग्रसर है। पदयात्रा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने वर्तमान सामाजिक एवं मीडिया परिवेश पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
आचार्य श्री ने कहा—“निकले हैं वो लोग मेरी शख्सियत बिगाड़ने,जिनके खुद के किरदार मरम्मत मांग रहे हैं..!”उन्होंने कहा कि आज के समय में किसी पर आरोप लगाना, आलोचना करना और चरित्र पर लांछन लगाना सामान्य प्रवृत्ति बन गई है। यह एक प्रकार का व्यापार सा हो गया है। जब किसी व्यक्ति को झूठा बदनाम किया जाता है, तब सत्य को स्थापित करना अत्यंत कठिन हो जाता है, क्योंकि न्याय की प्रक्रिया स्वयं जटिलताओं में उलझी रहती है।


आचार्य श्री ने कहा कि दुनिया में सबसे सरल कार्य है — किसी के चरित्र पर दोषारोपण करना। आरोप लगाने वाले का कुछ नहीं जाता, परंतु सामने वाले की पूरी जिंदगी उस कलंक को मिटाने में बीत जाती है।
इतिहास के उदाहरण दिए
उन्होंने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि माता सीता के शील पर लांछन लगाया गया और एक धोबी के कथन पर उन्हें गर्भावस्था में वनवास भेजा गया। इसी प्रकार भरत पर भी सत्ता षड्यंत्र का कलंक लगा। किंतु दोनों ने धैर्य एवं संयम से समय को ही सत्य का प्रमाण बनने दिया।

आचार्य श्री ने कहा—
“यदि किसी की ऊँची इमारत को हिलाना कठिन हो, तो कुछ लोग उसके काँच ही तोड़ देते हैं।”
मीडिया और एआई पर भी टिप्पणी
अपने उद्बोधन में उन्होंने वर्तमान मीडिया और सोशल मीडिया की प्रवृत्तियों पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि बिना सत्यापन के किसी भी प्रकार की सामग्री प्रसारित कर दी जाती है। एआई तकनीक के माध्यम से तस्वीरों और वीडियो में हेरफेर कर भ्रम फैलाया जा सकता है, जिससे व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुँचता है।उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश समाज में सकारात्मक और प्रेरक विषयों की अपेक्षा सनसनीखेज विषयों में अधिक रुचि दिखाई देती है।


27 फरवरी को 14 किलोमीटर का मंगल पदविहार
प्रसन्न सागरजी महाराज ससंघ का भव्य मंगल पदविहार 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को प्रातः 6:30 बजे प्रारंभ होगा।
यह पदविहार राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, श्यामगढ़ (पंचायत समिति मांडलगढ़, जिला भीलवाड़ा, राजस्थान) से प्रारंभ होकर जैन मंदिर, विराग विंध्य संतशाला, ठकुराई (तहसील बेगूं, जिला चित्तौड़गढ़, राजस्थान) तक पहुँचेगा। कुल दूरी लगभग 14 किलोमीटर रहेगी।
श्रद्धालुओं में पदयात्रा को लेकर उत्साह का वातावरण है।
नरेंद्र अजमेरापियूष कासलीवाल, औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
