मुनिश्री आदित्य सागर महाराज ने खुश रहने के 3 आधुनिक मंत्र दिए-ॐ इग्नोराय नमः, आनंदयाय नमः, डिलीटाय नमः
बांसवाड़ा
बाहुबली कॉलोनी में आर्यिका 105विकाम्याश्री माताजी व आर्यिका 105 विगुंजन माताजी के सान्निध्य में हो रहे ह्रीं कार तीर्थ पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के चौथे दिन भगवान का तप कल्याणक मनाया। सुबह भगवान का अभिषेक और शांतिधारा हुई। आशीष भैया पुण्याश ने जन्म कल्याणक की – पूजन, 24 भगवान के जन्म कल्याणक के अर्घ्य चढ़ाए। पूर्व रात में भगवान का पालना झुलाने का कार्यक्रम हुआ।
तपकल्याणक में सुबह भगवान का राज्याभिषेक हुआ। ब्राह्मी सुंदरी को विद्यादान दिया। इसके बाद दिन में भगवान के वैराग्य के दृश्य का मार्मिक मंचन किया गया। राजसभा चल रही थी और इसमें नीलाजना नाम की एक नर्तकी की नृत्य करते समय मृत्यु को प्राप्त हो जाती है। उसी समय अचानक मन परिवर्तित होता है और संसार की नश्वरता को जान आदिनाथ भगवान को वैराग्य हो जाता है। इसके बाद भगवान दीक्षा लेते हैं और तप करने के लिए वन में चले जाते हैं। जब वह भरत बाहुबली को को राज्य सौंपते हैं और वन की ओर गमन करते हैं तो लोगों के मन में श्रद्धा के भाव के साथ आंखें नम हो जाती हैं।



ह्रीं कार तीर्थ पंच कल्याणकप्रतिष्ठा महोत्सव में धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि आदित्य सागर जी ने कहा कि आयोजन के प्रयोजन को समझना जरूरी है। जीवन का प्रयोजन प्रीति से रहना है, आपस में प्रीति से रहें, प्रतिष्ठा का प्रयोजन धर्म श्रवण है, मनुष्य जीवन का प्रयोजन तपस्या भी है, मुनिश्री ने खुश रहने के तीन आधुनिक मंत्रॐ इग्नोराय नमः, आनंदयाय नमः, डिलीटाय नमः बताए। उन्होंने कहा कि जीवन में गुरु का तिरस्कार करना विष है।


जो अकड़े रहते हैं वे टूट जाते हैं, जो झुके रहते है वो बड़े होते हैं। जिसके सामने किसी को छोटापन महसूस ना करना पड़े वो बड़ा आदमी है, जो पंथवाद और संतवाद से दूर है वो ही सरल है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
