सुख शांति और सत्य का भीड़ से कोई संबंध नहीं प्रसन्न सागर महाराज
स्वास्तिधाम जहाजपुर
अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ की अहिंसा संस्कार पदयात्रा जहाजपुर के स्वस्तिधाम मुनिसुवृतनाथ भगवान के जैन मंदिर में विराजमान हैं उसी श्रुंखला में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि
प्रकृति ने तो सुख, शान्ति, आनंद और प्रसन्नता दी है.लेकिन दु:ख, परेशानी, अशान्ति, क्लेश और संक्लेश हमारी बुद्धि की उपज है. यही कारण है कि आज का आदमी भीड़ में जीने का आदि हो गया है। इसलिए अपने आप से और अपनी आदतों से टूट गया है। भीड़ के पास आग्रह तो है पर सत्य नहीं। सुख, शान्ति और सत्य का भीड़ से कोई संबंध नहीं है। जहाँ भीड़ है वहाँ अक्सर असत्य होता है। जीवन का सत्य कामना, वासना नहीं, सत्य, साधना, सत्संग और सदाचरण ही है। कामना, वासना, अच्छे भले इन्सान को शैतान बना देती है और साधना, सत्संग, पतित से इन्सान को पावन और भगवान बना देती है। वासना का अर्थ है – अपने से, अपने आप से, और आत्मा से दूर जाना है और सत्य। साधना और सत्संग का अर्थ है – अपने पास लौटना। मनुष्य यदि अपनी कामना, वासना और इच्छाओं पर काबू कर ले तो उसे नश्वर संसार में भी सुख, शान्ति और आनंद का महासागर दिखाई देने लगे।
भगवान बनने का एक ही मार्ग है – वीतराग धर्म। मनोविकार के चंगुल में फंसकर व्यक्ति अपनी अनन्त सम्भावनाओं को खो देता है। शरीर के तल पर जीने वाले लोग सत्य और आत्मा का साक्षात्कार नहीं कर पाते। सत्य को जानना कठिन नहीं है, सत्य को बताना कठिन है। सत्य की अभिव्यक्ति शब्दों में सम्भव नहीं है। इसलिए –सत्य साधना तक पहुँचने के लिये, बड़े-बडे़ कदमों की उतनी जरूरत नहीं है जितनी सधे कदमों और सधे मन की ज़रूरत है…!!!
परम पूज्य गुरुदेव सिंह निष्क्रिडित व्रत्तकर्ता अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज जी चतुर्विघ संघ दिनाँक 20 फरवरी 2026, शुक्रवार, सुबह 9.15 बजे से 22 फरवरी रविवार दोपहर तक मुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, अतिशय क्षेत्र स्वस्ति धाम, जहाजपुर जिला भीलवाड़ा राजस्थान में विराजमान है दर्शन कर पुण्य लाभ ले
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
