नव दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव का मोक्ष कल्याणक के साथ हुआ संपन्न आचार्य पद प्रतिष्ठापन समारोह भक्तों की अपार उपस्थिति में हुआ सम्पन्न

धर्म

नव दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव का मोक्ष कल्याणक के साथ हुआ संपन्न आचार्य पद प्रतिष्ठापन समारोह भक्तों की अपार उपस्थिति में हुआ सम्पन्न

कचनेर
कचनेर के समीप 16 फरवरी से शुरू धर्म तीर्थ पंचकल्याणक महोत्सव का शुक्रवार की बेला में समापन हो गया इस आयोजन को अपना कुशल निर्देशन प्रज्ञा योगी आचार्य श्री
गुप्तिनदी जी गुरुदेव ने प्रदान किया वह इस तीर्थ का निर्माण और प्रेरणा प गुरुदेव की ही रही है। इस भव्य आयोजन को सारस्वताचार्य देवनंदी जी महाराज, आचार्य मयंक सागर जी महाराज, आचार्य रवि नंदी जी महाराज एवं आर्यिका माताजी संघ व अनेक साधु संतों का सानिध्य इस आयोजन को मिला।

 

 

 

 

 

 

 

शुक्रवार की अनुपम बेला में मोक्ष कल्याणक समारोह संपन्न हुआ व समस्त क्रियाविधि संपन्न की गई। इन अभूतपूर्व क्षण में पूज्य आचार्य श्री गुप्तिनंदीजी गुरुदेव द्वारा अपने परम प्रभावक शिष्यों मुनि श्री सुयशगुप्त जी महाराज, मुनि श्री चंद्रगुप्त जी महाराज को आचार्य पद प्रदान किया। एवं समस्त आचार्य मुनि संघ व साधु संतों की मौजूदगी में आचार्य श्री द्वारा आचार्य पद के संस्कार कर उन्हें आचार्य पद पर सुशोभित किया। अभी यह दोनों मुनिराज आचार्य आचार्य श्री सुयशगुप्त जी महाराज एवं आचार्य श्री चंद्रगुप्त जी महाराज के नाम से पुकारे जाएंगे। मोक्ष कल्याणक महोत्सव की संपन्नता के बाद 25 फरवरी से 7 मार्च तक महामस्तकाभिषेक होगा।

 

इस अवसर पर औरंगाबाद के पूर्व सांसद चंद्रकांत खैरे व पूर्व महापौर नंदकुमार घोडिले इस आयोजन में पधारे वह समस्त आचार्य व समस्त साधु संतों का मंगल आशीष भी प्राप्त किया। इस अवसर पर पंचकल्याणक समिति के अध्यक्ष संजय पापड़ीवाल की अगुवाई में उनका भाव भरा अभिनंदन किया गया।

 

इससे पूर्व प्रतिदिन जी भाटी श्रीजी का अभिषेक पूजन व समस्त साधु संतों के मंगल उद्बोधन सभी भक्तों को प्राप्त हुए। मुंबई से पधारे पंडित प्रदीप कुमार जैन मधुर उनके साथ उनके सहयोगी ने पंचकल्याणक महोत्सव कोई समस्त क्रिया विधि को संपन्न करवाया और कुशलता के साथ समस्त धार्मिक क्रिया विधि संपन्न करवाई। मंदिर जी ने मंत्र उच्चारण के बाद कलशारोहण किया गया। इस आयोजन में एक खास बात हो रही जिसमें 24 फीट ऊंचा 300 किलो वजन का पीतल का ध्वज खड़ा किया गया। साथ ही इस ध्वज के दोनों तरफ डेढ़ सौ किलो वजनी 21 फीट ऊंचा झंडे का फोन लगाया गया था।

 

वही गौर करें तो मंदिर में 300 किलो वजनी एक पीतल की घंटी भी विधिवत रूप से स्थापित की गई। इसे पीतल की घंटी की कि जो ध्वनि है वह कहीं किलोमीटर तक सुनाई देती है। जो एक नया वातावरण उत्पन्न नगर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। इस आयोजन की बेला में भव्य शोभायात्रा नवीन रथों पर निकाली गई जिसमें इंद्र इंद्राणी व भक्तगण मौजूद रहे। पंचकल्याणक समिति ने सभी का स्वागत किया। इस आयोजन में भारत देश से ही नहीं विद्यार्थियों सभी भक्तों पधारे और उन्होंने यहां की आयोजन वह प्रबंधन की जमकर सराहना की।

 

 

 

 

महोत्सव की सफलता का श्रेय सभी को पापड़ीवाल
पंचकल्याणक महोत्सव के समापन पर बोलते हुए पंचकल्याणक समिति के अध्यक्ष श्रीमान संजय पापड़ीवाल ने कहा कि गोरे गुरुदेव का आशीर्वाद, व अनेक साधु-संतों की शुभकामनाएं, सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों का सहयोग से इस तीर्थ का निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा यहां आयोजित पहला पंचकल्याणक समारोह सभी के योगदान से सफल रहा उन्होंने इसका श्रेय समस्त पदाधिकारियों से लेकर छोटे कार्यकर्ताओं तक सभी को दिया। उन्होंने कहा कि इन सभी की अच्छी योजना, समन्वय और क्रियान्वयन को जाता है।

पंचकल्याणक के आकर्षक क्षण
गुरुवार और शुक्रवार की बेला में पंचकल्याणक में अभूतपूर्व झंडा रहे जिसमें शोभायात्रा में तीन नए रथ आए जो आकर्षण का केंद्र बिंदु थे जो मध्य प्रदेश से से विशेष रूप से बुलाए गए थे इनमें मुख्य रथ 15 फीट लंबा एवं दो अन्य 11, 11 लंबे थे। इस महोत्सव के समापन पर कई भक्तों की आंखें नम नजर आई और भावुक नजर आए। इस आयोजन में रथ की भव्यता ने सभी का ध्यान अपनी और खींचा। संध्या की बेला में क्षेत्र हर जगह दूधिया रोशनी से जगमग आ रहा था। आयोजन में आए भक्तों ने आयोजकों एवं पंचकल्याणक समिति का व समस्त समिति संयोजक ओं का आयोजन की कुशलता पूर्वक संचालन करने पर भाव भरा धन्यवाद दिया एवं जमकर तारीफ की।
विशेष रुप से भक्तों ने अच्छे परिवहन, अच्छे आवास, व लजीज भोजन एवं वहां की व्यवस्था के लिए धन्यवाद दिया

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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