बोलखेड़ा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव:- चतुर्थ दिवस तपकल्याणकमहाराजा आदिकुमार को हुआ वैराग्य तो मुनि प्रणम्य सागर ने किए दीक्षा संस्कार

धर्म

बोलखेड़ा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव:- चतुर्थ दिवस तपकल्याणकमहाराजा आदिकुमार को हुआ वैराग्य तो मुनि प्रणम्य सागर ने किए दीक्षा संस्कार

   (कामां)

जम्बू स्वामी की तपोभूमि ग्राम बोलखेड़ा में वर्धमान पंच बालयति तीर्थ पर चल रहे जैन धर्म के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के चतुर्थ दिवस तप कल्याणक के अवसर पर अर्हम योग प्रणेता मुनि प्रणम्य सागर महाराज ने कहा कि जैन धर्म में तप कल्याणक (दीक्षा कल्याणक) तीर्थंकर के जीवन का वह अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण है, जब वे सांसारिक सुख-भोग त्यागकर आत्म-कल्याण के लिए दिगंबर दीक्षा धारण करते हैं। यह महोत्सव वैराग्य, वैचारिक शुद्धि और मोक्ष मार्ग के प्रारंभ का प्रतीक है, जो सांसारिक मोह त्याग कर ज्ञान और आत्म-साधना (तपस्या) की ओर ले जाता है।

 

 

मुनि प्रणम्य सागर ने कहा कि आज महाराजा ऋषभनाथ अर्थात आदिकुमार की वैराग्य की अनुमोदना के लिए स्वयं इंद्र भी अपने मेघों के साथ आये हैं। बोलखेड़ा कि पावन धरा पर अतिशय हो रहे हैं। यह भूमि वास्तविक रूप से तपोभूमि है। उन्होंने कहा कि बिना वैराग्य के जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त नही किया जा सकता है।

*महाराज आदिकुमार की हुई दीक्षा*

महाराज आदिकुमार का शासन उत्कृष्ठता के साथ चल रहा था कि एक दिन अप्सरा नीलांजना के नृत्य को देखकर वैराग्य की अनुभूति होती है। महाराजा आदिकुमार दीक्षा लेकर वन गमन को प्रस्थान करते हैं। लौकांतिक देवो का आगमन होता है। मनुष्य और देवो के मध्य पालकी उठाने का संवाद देखकर उपस्थित नर नारी भक्ति से सरोबार हो उठते हैं।

*माता मरुदेवी हुई भावुक

* प्रतिष्ठाचार्य शुभम जैन व धीरज भैया के अनुसार आदिकुमार के दीक्षा प्रसंग में माता मरुदेवी आदिकुमार को रोकने का प्रयास करती हैं।तो माता के साथ सम्पूर्ण वातावरण भावुकता से भर उठता है। इस अवसर पर मुनि प्रणम्य सागर महाराज द्वारा दीक्षा के संस्कार प्रदान किये जाते हैं वही श्रावकों व त्यागियों द्वारा नवीन पिच्छिका व कमण्डलु भी भेंट किये गए।

 

*पालना झुलाई व बाल क्रीड़ा*

पंचकल्याणक समिति अध्यक्ष गोकुल राम जैन ने बताया कि तपकल्याणक की पूर्व संध्या पर भगवान की पालना झुलाई अशोक कुमार जैन दिल्ली परिवार द्वारा की गई तो संगीतकार शानू जैन महवा के मधुर संगीत पर श्रावकों ने भक्ति नृत्य किया। इस अवसर पर भगवान की बाल क्रीड़ा का मंचन किया गया तो ह्रदयांश जैन बड़जात्या पुत्र दौलत जैन कामां बालक आदिकुमार बने। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव से आसपास की जैन समाजों में धार्मिक वातावरण बना हुआ है।

     संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *