♦ध्वजारोहण ,घटयात्रा के साथ आचार्य संघ सानिध्य में हुआ पांच दिवसीय पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभगर्भ के संस्कार ज्ञान से जीवन का निर्माण होकर निर्वाण होता हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

पदमपुरा जयपुर

प्रतिमा चाहे पाषाण,या रत्न रन की हो, उसमें भगवान के गुणों का संस्कार का आरोपण किए जाते हैं। प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान के समय भोग भूमि थी, बाद में कर्म भूमि प्रारंभ हुई श्री आदिनाथ भगवान से 6 भगवान् श्री पदम् प्रभ सबने धर्म का प्रवर्तन किया। एक संयोग है कि श्री महावीर जी ओर श्री पदम प्रभ अतिशय क्षेत्र हैं दोनों क्षेत्रों में भूगर्भ से प्रतिमाएं निकली हैं दोनों स्थानों पर पंडित श्री हँसमुख जी के साथ चौबीसी का पंच कल्याणक हमारे द्वारा हुआ।
यह मंगल धर्म देशना वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अतिशय क्षेत्र पदमपूरा में प्रारंभ पंच कल्याणक के प्रथम गर्भ कल्याणक पर आयोजित धर्म सभा में प्रगट की । गुरु भक्त राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि माता जब संस्कारित होगी तभी वह बच्चों को संस्कारित कर सकती है।

प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी ने गर्भस्थ शिशु को रात्रि भोजन त्याग के उदाहरण से बताया कि माता के गर्भ में दिये धार्मिक ज्ञान संस्कार से ही तीर्थंकर,मुनि ,महापुरुष ओर लौकिक एडवोकेट, डाक्टर, सी ए इंजीनियर बनते है।
आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने बताया तीर्थंकर कुल, जैन धर्म, उच्च मनुष्य गति में माता के विचार, भाव खानपान अच्छा होना चाहिए।गर्भपात कराने के दुष्परिणाम होते हैं।प्राचीन पदमप्रभ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पदम पूरा बाड़ा मंदिर में नूतन चौबीसी का पंच कल्याणक , विश्व शांति महायज्ञ एवं पदम वल्लभ नूतन शिखर पर कलश एवं ध्वज आरोहण कार्यक्रम प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी परंपरा के आचार्य श्री धर्म सागर जी से सन 1969 में दीक्षित 76 वर्षीय पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित अनेक साधुओं के पावन सानिध्य में 5 दिवसीय पंच कल्याणक महा महोत्सव 18 फरवरी 2026 से शताधिक महिलाओं की कलश घट यात्रा , ध्वजारोहण,भूमि शुद्धि ,मंडप उद्घाटन मंगल श्री जी विराजमान मंगल कलश स्थापना ,अभिषेक पूजन समस्त आचार्य आर्यिका संघ के मंचासीन होने पर प्रारंभ हुआ

एडवोकेट सुधीर, हेमंत सो
गानी ,सुरेश सबलावत ने बताया कि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य एवम प्रतिष्ठाचार्य पंडित हसमुख जैन धरियावद के निर्देशन में पांच दिवसीय आयोजन में भगवान के पांच कल्याणको के माध्यम से पाषाण को परमात्मा बनाने की क्रियाएं संपन्न की जाएगी। बुधवार प्रातः विशाल घट यात्रा अहिंसा सर्कल से निकाली गई जिसमे जिनेन्द्र प्रभु को प्रतिमा के साथ अश्व, हाथी, बैंड, 108 मंगल कलश के साथ हजारों श्रावकगण नगर के मुख्य मार्गो से होकर प्रतिष्ठा स्थल मैदान में बने अयोध्या नगरी नाभिराय पांडाल में पहुंचें। ध्वजारोहणकर्ता श्रीमती पुष्पा ,श्री विवेक आशा काला जयपुर परिवार द्वारा ध्वजारोहण पांडाल उदघाटन श्री सुधांशु ऋतु कासलीवाल परिवार ने किया मंगलाचरण कीर्ति दीदी ने किया चित्र अनावरण दीप प्रवज्जलन कमल ,नरेश चांदवाड परिवार,मंगल कलश स्थापना शकुंतला,अशोक परिवार द्वारा किया गया। है श्री हेमंत सोगानी ने स्वगत उद्बोधन में मंदिर का प्राचीन इतिहास बताया। प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख शास्त्री,मनोज शास्त्री, पंडित भागचंद ,पंडित विशाल का सम्मान किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी नेमिचन्द्र छाबड़ा नलवाड़ी परिवार द्वारा की गई इस परिवार को सम्पूर्ण पंच कल्याणक की पूजन सामग्री प्रदान करने का सौभाग्य भी मिला हैं। मंदिर कमेटी ने सभी पुण्यार्जक दान दाता परिवारों का सम्मान किया ।कार्यक्रम का संचालन श्री राकेश सेठी ने किया तत्पश्चात भगवान के माता पिता , सोधर्म कुबेर,यज्ञनायक सहित मुख्य इंद्र इंद्राणी, प्रतिंद्र एवम मुख्य पात्रों द्वारा यागमंडल विधान पूजा की गई ।दोपहर में गर्भ कल्याणक संस्कार, गोद भराई, रात्रि में आरती के बाद महिला मंडल के मंगलाचरण के बाद अष्ट कुमारी द्वारा माता की सेवा आदि कार्यक्रम संपन्न हुए। रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
