असली शांति मनुष्य के अंदरः योग सागर महाराज
केशवरायपाटन
अतिशय क्षेत्र में धर्मसभा में निर्यापक श्रमण मुनि योग सागर महाराज ने कहा कि असली शांति बाहर नहीं, बल्कि मनुष्य के अपने अंदर है। उन्होंने बताया कि जग में सुख कहीं और नहीं है, सुख की खान तो स्वयं की नाभि में है। मृग भटके बिन ज्ञान, इसी प्रकार मनुष्य भी बिना आत्मज्ञान के भटकता रहता है।
महाराज ने कहा कि आत्मा की शांति की खोज में हर आत्मा दिन-रात प्रयत्नशील रहती है। सम्यक दृष्टि बनाने का महत्व बताते हुए महाराज ने कहा कि जैन दर्शन में अपना सो अपना, तेरा सो तेरा की भावना अपनाना आवश्यक है, जिससे किसी पर हावी होने की प्रवृत्ति नहीं होती। धर्मसभा में महाराज ने भावनाओं की शुद्धि पर जोर देते हुए कहा कि जैन दर्शन में सोलह भावनाओं की चर्चा की गई है, जिन्हें आत्मसात कर ही साधक परम मुक्तावस्था को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने विशेष रूप से मात्सर्य (ईर्ष्या) को दोष बताते हुए कहा कि यह व्यक्ति को दूसरों के सुख और सफलता देखकर बुरा-भला कहने और अहंकार बढ़ाने पर मजबूर करता है।

महाराज ने श्रद्धालुओं को हमेशा दूसरों के प्रति सम्मानपूर्वक व्यवहार करने की सीख दी। मुनि संघ और माताजी संघ की आहारचर्या के लिए कोटा-बूंदी से जैन समाजबंधु शामिल रहे।
दर्शनार्थियों की सेवा में कमेटी अध्यक्ष गुलाबचंद जैन, राजेंद्र जैन बिट्टू, जितेंद्र शाह, संदीप लुहाड़िया और संजय गंगवाल सहित महिला और युवा मंडल सक्रिय रहे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
