लक्ष्य हमेशा बड़ा होना चाहिए जो मंदिर में झाड़ू लगाता है उसके कर्म झड़ जाते है मुनिश्री
घाटोल
दिगंबर जैन अहिंसा मंदिर हेरो डेम मे परम पूज्य सर्वश्रेष्ठ साधक आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य
मुनि विमल सागर महाराज ,मुनि अनंत सागर महाराज, मुनि धर्म सागर महाराज, मुनि भाव सागर महाराज के सानिध्य में सोमवार को प्रातः काल की वेला में धर्मसभा का आयोजन हुआ इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि विमल सागर महाराज ने कहा कि सभी सीए , डॉ ,एमबीए, इंजीनियर आदि की डिग्री ले रहें है लेकिन अपने कल्याण के बारे में नही सोच रहे है घर बनाते है,

लेकिन अपने आत्मघर की नही सोचते है, जीवन बुलबुला है कब फूट जाएं कह नही सकते, प्रभु का मंदिर बनाना सिद्धों की यात्रा का निमित्त है, जो साथ में नही जाना है उसके लिए दिन रात मेहनत करते है, खाल मिली थी यही खाली हाथ जाता हूं, नंदीश्वरद्वीप में भक्ति, पूजा ,आराधना के माध्यम से अधिक मात्रा में द्रव्य चढ़ा कर पुण्य का संचय करते है, 8 दिन पाप का त्याग करके पूजन भक्ति की जाती है, दान ,त्याग के माध्यम से ऐसा मंदिर निर्माण हो जो निर्वाण के लिए कारण बने, लक्ष्य हमेशा बड़ा होना चाहिए, ऐसा कहना चाहिए बड़ा सा सुंदर सा मंदिर बनायेंगे ,मंदिर बनाने का पुण्य समाप्त नहीं होता है,
खजुराहो में प्रशस्ति में लिखा है जो मंदिर की पूजन आदि की व्यवस्था करेगा में उसका दासानुदास रहूंगा, फिरोजाबाद में बड़े सेठ मंदिर में झाड़ू लगाते थे ,जो मंदिर में झाड़ू लगाता है उसके कर्म झड़ जाते है.



मुनि अनंत सागर महाराज ने कहा कि जिसने अपने जीवन को भक्ति से जोड़ लिया वह आगे बढ़ जाता है ,तप, दान ,पूजा ,साधना से भी व्यक्ति आगे बढ़ जाता है, प्रभु की उपासना से जीव प्रभु बन जाता है ,असाता कर्म भक्ति के माध्यम से समाप्त हो जाते हैं, इस पर्व में विशेष पुण्य इकट्ठा होता है, पहले प्रचार, प्रसार के साधन नही थे लेकिन भक्ति बहुत थी, पूजन आदि से अपने जीवन को अच्छा बनाए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
