प्राचीन मंदिर में एक ही शिला पर 4 आदमकद प्रतिमाएं, तीन प्रतिमाएं पद्मासन मुद्रा में और एक खड्‌गासन मुद्रा में तारागढ़ दुर्ग में 2 हजार साल पुराना जैन मंदिर

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प्राचीन मंदिर में एक ही शिला पर 4 आदमकद प्रतिमाएं, तीन प्रतिमाएं पद्मासन मुद्रा में और एक खड्‌गासन मुद्रा में तारागढ़ दुर्ग में 2 हजार साल पुराना जैन मंदिर
खंडार
रणथंभोर राष्ट्रीय अभयारण्य स्थित खंडार के तारागढ़ दुर्ग में मौजूद 2 हजार वर्ष प्राचीन श्री दिगंबर जैन मंदिर अपनी दुर्लभ और अद्वितीय प्रतिमाओं के कारण पूरे राजस्थान में में खास पहचान रखता है। एक ही चट्टान पर तराशी गई चार आदमकद जैन प्रतिमाएं प्रदेश में कहीं और नहीं मिलतीं। अब विश्व जैन संगठन ने इस धरोहर के संरक्षण और विकास की मांग को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।

 

तारागढ़ दुर्ग के भीतर तीन परकोटों से घिरे इस प्राचीन मंदिर में भगवान महावीर, पार्श्वनाथ, आदिनाथ और शांतिनाथ की चार विशाल प्रतिमाएं एक ही शिला पर उत्कीर्ण हैं। इनमें तीन प्रतिमाएं पद्मासन मुद्रा में और एक खड्गासन मुद्रा में है। भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा लगभग 7 फीट ऊंची है, जबकि अन्य तीन प्रतिमाएं करीब 6 फीट ऊंची हैं। मंदिर परिसर में क्षेत्रपाल बाबा की प्रतिमा भी विराजमान है।

राजस्थान में ऐसी प्रतिमाएं केवल खंडार में ही है

 

 

 

राजस्थान में ऐसी प्रतिमाएं केवल खंडार में ही है, जबकि दक्षिण भारत में कहीं-कहीं इस प्रकार की मूर्तियां देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि जयपुर से तीर्थ संरक्षण यात्रा लाकर समाज का उद्देश्य अधिकाधिक श्रद्धालुओं को यहां जोड़ना और धरोहर के संरक्षण के लिए जनजागरण करना है। संगठन के पदाधिकारी दिवेश जैन ने बताया कि प्रतिमाओं पर लगभग 1 हजार वर्ष पुराना शिलालेख भी अंकित है, जिसमें मंदिर के जीर्णोद्धार का संगठन ने सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि वन क्षेत्र में स्थित इस स्थल तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को सुगमता मिल सके। कोषाध्यक्ष राखी जैन ने कहा कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मंदिर के विकास के प्रयास किए जाएंगे।

 

करीब 1 हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर लगभग 60 गुणा 100 वर्ग फीट क्षेत्र में फैला है।

जैन समाज खंडार के अध्यक्ष पारस जैन ने बताया कि वर्ष 2005, 2010, 2015, 2020 और 2023 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जा चुका है। किले में सात द्वार, सात कुंड और तीन ऐतिहासिक तोपों के अवशेष मौजूद हैं। 12 फीट चौड़ीपरकोटा दीवारें अब संरक्षण के अभाव में क्षतिग्रस्त हो रही हैं। बरसाती पानी की निकासी नहीं होने और भूस्खलन के खतरे से यह प्राचीन धरोहर असुरक्षित होती जा रही है। विश्व जैन संगठन ने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर खंडार के इस ऐतिहासिक स्थल के संरक्षण और समग्र विकास की मांग सरकार से की है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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