वैराग्य का वैभव • प्रमोद भैया की छुल्लक दीक्षा पूर्व ऐतिहासिक विनोली यात्रा बग्गी पर सवार होकर निकले मुमुक्षुभैया, दिखा वैराग्य व भक्ति का उत्सव

धर्म

वैराग्य का वैभव • प्रमोद भैया की छुल्लक दीक्षा पूर्व ऐतिहासिक विनोली यात्रा बग्गी पर सवार होकर निकले मुमुक्षुभैया, दिखा वैराग्य व भक्ति का उत्सव

 गुना

धर्मनगरी गुना की सड़कों पर शनिवार शाम वैराग्य, श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने कोमिला। वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के मंगल सानिध्य में होने जा रही ब्रह्मचारीप्रमोद भैया (मावा बाटी वाले) कीछुल्लक दीक्षा के पूर्व नगर में भव्यऔर ऐतिहासिक विनोली यात्रा निकाली गई। 

सांसारिक मोह माया का परित्याग कर संयम के मार्ग परअग्रसर दीक्षार्थी के सम्मान में पूरा जैन समाज श्रद्धा के साथ सड़कों पर उमड़ पड़ा।विनोली यात्रा की शुरुआत सायंकाल बतासा गली स्थित दीक्षार्थी के निज निवास से हुई।सुसज्जित बग्गी पर सवार होते ही प्रमोद भैया के दीक्षार्थी भैया जी की जय’ और आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज की जय’ के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा।

दीक्षार्थी के मुख पर झलकती वैराग्य की शांति और सौम्य मुस्कान ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं ने घरोंके बाहर चौक पूर कर, आरती की।

वैराग्य उत्सव नई पीढ़ी को धर्म से जोड़ता है

सकल दिगंबर जैन समाज एवं पंचायत ट्रस्ट कमेटी ने इस भव्य आयोजन कोगुना के इतिहास में अविस्मरणीय बताया। समाजजनों का कहना था कि इस प्रकार के वैराग्य और संयम के उत्सव नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और नैतिकमूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। प्रमोद भैया की विनोली यात्रा ने यह संदेशदिया कि भौतिक सुखों से ऊपर आत्मकल्याण का मार्ग सर्वोपरि है। समाज ने विश्वास जताया कि यह आयोजन आने वाले समय में अनेक युवाओं को संयम और साधना की प्रेरणा देगा। वही इन मांगलिक क्षणों में दीक्षार्थी का आत्मीय स्वागत किया गया महिलाएं केसरिया परिधानों में मंगल कलश और थालसजाकर नृत्य करती नजर आईं,वहीं श्वेत वस्त्रों में पुरुष भक्ति गीतों पर झूमते रहे। यह भव्य जुलूस बतासा गली से निचलाबाजार, सदर बाजार और सुगनचौराहा जैसे व्यस्त मार्गों से होकर संत शाला पहुंचा।

संत शाला में भावपूर्ण गोद भराई संस्कार संपन्न:

संत शाला पहुंचने के पश्चात रात्रि में दीक्षार्थी प्रमोद भैया का गोद भराई संस्कारभावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के मंगलसानिध्य में समाज के वरिष्ठ जनों, परिजनों एवं श्रद्धालुओं ने दीक्षार्थी की गोद भरकर उन्हें संयम पथ पर आगे बढ़ने की अनुमति और आशीर्वाद प्रदान किया।

जैन परंपरा में गोद भराई संस्कार त्याग और तप के मार्ग को स्वीकार करने वाले मुमुक्षु के प्रति समाज की सहमति और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर वातावरण अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक रहा बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और भजनों की मधुर स्वर लहरियों ने वातावरण को भक्तिमय बनादिया। नई सड़क मार्ग से होते हुए जब यात्रा संत शाला पहुंची, तो आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज के दर्शन कर दीक्षार्थी सहितसमस्त समाजजन निहाल हो उठे।”कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद रहे।

  संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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