प्रतिकूल अवस्था मे जो धर्म पालन कर रहे हैं, वे प्रशंसनीय है- सुधासागर महाराज 

धर्म

प्रतिकूल अवस्था मे जो धर्म पालन कर रहे हैं, वे प्रशंसनीय है- सुधासागर महाराज

आगरा, दि.2 अगस्त,

आज की भौतिक दौड भाग की जिंदगी मे थोडा बहुत भी जो धर्म कर रहा है वह पुण्यवान है क्योंकि चतुर्थकाल मे जो पुण्य हजारो वर्ष में एकत्रित करके होता था, वही पुण्य पंचमकाल में एक वर्ष की मेहनत मे हो सकता है क्योंकि चतुर्थ काल, उस रास्ते के समान है, जहां खूब रौशनी है, मार्ग सूचक बोर्ड लगा है और लोग भी मार्ग बताने वाले मिल जाते हैं, परन्तु पंचम काल उस रास्ते के समान है जहां घुप अंधेरा है, कोई मार्ग सूचक बोर्ड भी नहीं लगा है, और कोई मार्ग बताने वाला नहीं है, फिर भी मंजिल पर बडे जा रहे हैं! अत: इस काल मे जितना भी समय मिले व्यक्ती को प्रवचन, पूजन, अभिषेक, आहार दान आदि धर्म ध्यान क्रीया अवश्य करते रहना चाहीये,

 

 

 

यह उद्गार आगरा नगर मे वर्षायोग के लीये पधारे निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव 108 सुधासागर जी महाराज ने एम डी जैन इन्टर कालेज हरीपर्वत परिसर पर आयोजित विशाल सभा में कीये! मनोज कुमार जैन बांकलीवाल कमलानगर आगरा! ने बताया की महाराज श्री न कहा कि प्रतिकूल परिस्तिथी मे धर्म करने वालो की तो स्वर्ग मे भी प्रशंसा होती है! उन्होंने कहा कि जिन घरो मे धर्म नहीं होता और न धर्म कार्य मे पती का सहयोग मिलता, उसके बाद भी उस घर की स्त्री धर्म का डंका बजातीं हैं उनकी जितनी प्रशंसा की जाये वो कम है जैसे महारानी चेलना! अत: धर्म करते रहो, न जाने कब तुम्हारा शुभ का समय आ जाये, कोई जरूरी नहीं पहले नही कुछ हुआ तो आगे भी कुछ शुभ न हो!

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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