जितनी जल्दी आप अपने जीवन की जिम्मेदारी लेंगे, सफलतायें भी आपके कदमों में आकर घुटने टेक देगीः आचार्य प्रसन्न सागर महाराज
औरंगाबाद/जयपुर
आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि दूसरों पर निर्भर होकर जीवन जीने का अर्थ है हाथ, पैर, शरीर ठीक होने पर भी हम अफी और अपाहिज हो गये। किसी कार्य में दूसरों का सहयोग लेना गलत नहीं है,, लेकिन उन पर ही निर्भर हो जाना गलत है। दूसरों पर निर्भर होनायानि अपनी योग्यता को खत्म कर देना जैसा ही है।ये उदगार आंहिसा संस्कार पद यात्रा के प्रणेता सिंहनिष्क्रीडित व्रत करता अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने सिद्धार्थ नगर में शुक्रवार को सायंकाल धर्म सभा को सम्बोधित करते हुये व्यक्तकिये।
उन्होंने आगे कहा कि जब हम किसी पर निर्भर होते हैं, तो हम अपने आपको लाचार और असहाय महसूस करने लगते हैं। दूसरों पर निर्भर होने से पहले हम लाचार होते हैं, फिर धीरे धीरे आदत सी हो जाती है और हम बिल्कुल पंगु हो जाते हैं। सहयोग लेना बुरा नहीं है, असहाय और निर्भर होना बुरा है।

किसी भी कार्य की शुरुआत करो, एक दो बार असफल होंगे तो कोई बात नहीं। भरोसा करना है तो स्वयं पर करो, दूसरों पर भरोसा करने से जीने की उम्मीदें कम हो जाती है। क्योंकि बनेबनाये पथ पर चलने वाली नहरें होती है, नदियाँ नहीं। नदियाँ चट्टानों को चौर कर, अपना पथ स्वयं बनाती है और आगे बढ़ती है। तभी तो वो सागर से मिल पाती है। ना सिर्फ सागर से मिलती है वरन वो खुद सागर हो जाती है।♦



धर्म सभा में राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोगेश्वर गर्ग ने आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने श्री गर्ग को लौंग की मंत्रित माला पहनाई।
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
