गणिनी गुरु मां विशुद्धमति माताजी के 56 वे दीक्षा दिवस पर विनयाजली
पूज्य गणिनी गुरु मां आर्यिका 105 विशुद्धमति माताजी का आज हम 56 व दीक्षा दिवस मना रहे हैं यह हम सभी के लिए गौरव का क्षण है कि ऐसी साधना की जीवंत प्रतिमूर्ति के दर्शन एवं उनका सानिध्य हमें प्राप्त हो रहा है। जिनका जीवन बचपन से ही वैराग्य की ओर अग्रसर रहा।
महज 5 वर्ष की उम्र में इन्होंने कंदमूल का त्याग कर दिया था वे आगे बढ़ती चली गई और श्री महावीर जी तीर्थ पर कृष्णाबाई के आश्रम में जाकर धर्म अध्ययन की ओर अग्रसर हो गई लेकिन उनके कदम और आगे बढ़ने को थे और संयम के पद पर बढ़ती चली गई। और यहां रहकर धर्म अध्ययन किया 14 वर्ष की आयु में ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर उत्कृष्टता की ओर अग्रसर होते हुए केशलोच करना प्रारंभ कर दिया। 1966 में सप्तम प्रतिमा, गृह त्याग मीठा रस एवं दही का त्याग कर दिया। वे और अग्रसर हो गई और सन 1970 में उन्होंने तेल का भी त्याग कर दिया। आगे चलकर गिरनार गौरव आचार्य श्री 108 निर्मल सागर महाराज से नारी का सर्वोच्च पद आर्यिका दीक्षा ग्रहण की। समय बढ़ता चला गया और आगे चलकर1972 में सांगोद में आचार्य विमल सागर महाराज भिंड वालों ने उन्हें गणिनी पद से सुशोभित किया।

पूज्य गुरु मां ने अनेक बेटियो संयम के मार्ग पर अग्रसर करते हुए धर्म की शिक्षा के साथ वैराग्य के पद की ओर अग्रसर किया आपको बता दें की विश्व में एकमात्र गणिनी आर्यिका हैं जिन्होंने सर्वाधिक दीक्षाए प्रदान की है। जब गुरु मां 20 वर्ष की थी तब से आज तक सर्वाधिक दीक्षाए प्रदान की हैं।

ग्वालियर नगर की गौरव गुरु मां के आशीर्वाद से चाहे वह नेता हो अभिनेता हो चाहे वह दिगंबर हो चाहे वह श्वेतांबर जैन हो या फिर अन्य धर्म के व्यक्तियों उनके आशीर्वाद को पाकर समृद्धि की ओर बढ़ रहे हैं। इसका प्रभाव इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में लोकसभा अध्यक्ष श्रीमान ओम बिरला ने गुरु मां के कोटा प्रवास के दौरान अपना नामांकन दाखिल करने से पूर्व गुरु मां का आशीर्वाद प्राप्त किया था और आज वह लोकसभा अध्यक्ष के रूप में सभी के सामने हैं वहीं वर्तमान में रामगंज मंडी क्षेत्र के विधायक वर्तमान में राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री मदन दिलावर कहते हैं कि आज मैं जहां कहीं भी हूं गणिनी गुरु मां के आशीर्वाद से हूं। पूज्य गुरु मां को अनेक उपाधियों से भी सुशोभित किया जा चुका है जिसमें त्रिलोक कल्याणी, सिद्धांत रत्न आदि शामिल है कोटा में जब गुरु मां का 50 वा दीक्षा दिवस मनाया गया था तब उन्हें गोल्डन बुक ऑफ रिकॉर्ड की ओर से सर्वश्रेष्ठ आर्यिका के रूप में सुशोभित किया गया था।

पूज्य गुरु मां के नियम एवं संयम साधना पर हम दृष्टि डालें तो गुरु मां की बहुत कठोर एवं उत्कृष्ट साधना है जो देखते बनती है।
जिस पर गुरु मां की कृपा एवं मुस्कान के साथ आशीष मिल जाती है वह अपने आप को धन्य मानता हैं।
गुरु मा की कथनी एवम करनी में कोई अंतर भेद नहीं होता वे पापों से डरती हैं और हमेशा आगम पर ही चलती हैं यदि हम गौर करें तो गुरु मां जैसा इस दुनिया में सचमुच को ही नहीं है यह सचमुच अपनी आत्म साधना को और बलवती कर रही हैं और यदि जिनवाणी का ज्ञान के बारे में कहें तो इनकी ज्ञान गंगा सचमुच बहती रहती है।

अंतर का इकतारा हरदम यही गाता है। अब ना हो जाए मंजिल मेरी दूर आया है पावन दिन भक्ति की ओर
दीक्षा जयंती पर भक्तों का है शोर।
आज के पावन दिन यही कामना करते हैं कि आपका संयम पथ ओर अग्रसर हो निरंतर हम सब पर आपकी आशीष की छांव निरंतर बरसती रहे।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
