पहले की शिक्षा सादगी पूर्ण थी पर संस्कारों की सम्पत्ति से सुसंपन्न थी.. अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज 

धर्म

पहले की शिक्षा सादगी पूर्ण थी पर संस्कारों की सम्पत्ति से सुसंपन्न थी.. अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज 

 औरंगाबाद/जयपुर

आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा की आज की आधुनिक शिक्षा में ना समझ न समझौता, ना विवेक न वाणी-व्यवहार। सिर्फ और सिर्फ बुद्धि का चातुर्य..!  उन्होंने कहा आज की आधुनिक शिक्षा में समझ कम बुद्धि का विकास ज्यादा हो रहा है। पहले की शिक्षा में समझ के साथ बुद्धि और विवेक का विकास होता था, इसलिए आज के बच्चे डर और डिग्री के कारण आत्म हत्या और डिप्रेशन का शिकार बन रहे हैं।आज की आधुनिक शिक्षा के बच्चे, कोई बात समझना नहीं चाहते, सिर्फ तर्क कुतर्क करके अपने बुद्धि बल को प्रदर्शित करते हैं। यही कारण है कि आज के बच्चे आधुनिक शिक्षा के कारण, माता पिता को माता पिता नहीं समझते, धर्म को ढोंग और साधु सन्यासीयो को भगोड़े साधु सन्यासी जान रहे हैं।

 

 

    उन्होंने कहा पहले की शिक्षा में सादगी थी, संस्कार थे, समझ और विवेक के विकास की पढ़ाई होती थी, और आज की आधुनिक शिक्षा में ना विवेक है, ना समझ है, ना संस्कार आज की आधुनिक शिक्षा में सिर्फ प्रतिस्पर्धा की अन्धी दौड़ है, या एक दूसरे को नीचा दिखाना।

 

 पहले की शिक्षा में संवाद था, समझ थी, समाधान और समझौता था, आज की आधुनिक शिक्षा में यह सब खत्म हो गया। पहले की शिक्षा में ना डर था, ना भय ना प्रतिस्पर्धा, ना डिग्री लेने का लोभ, इसीलिए पहले की शिक्षा में बच्चे शिक्षक से डरते थे, शिक्षक कहीं दिख जाये तो बच्चे छिप जाते थे। लेकिन आज की आधुनिक शिक्षा में यह सब खत्म हो गया।पहले की शिक्षा में वाणी व्यवहार, छोटे बड़़ो का मान सम्मान और आदर सत्कार था। आज की आधुनिक शिक्षा में यह सब दूर दूर तक नजर नहीं आता।

       आज की वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर कटाक्ष करते हुए गुरुदेव ने कहा किआज की आधुनिक शिक्षा पुस्तकों तक सीमित रह गई, य रोजगार, उद्यमिता, तकनीकी दक्षता, डिजिटल कौशल, य व्यवसायिक प्रशिक्षण तक ही सिमटकर रह गई…!!!           

 

नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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