आध्यात्मिक हो या लौकिक दोनों प्रकार की उपलब्धियों के लिए स्थिरता जरूरी है प्रमाण सागर महाराज महाराज श्री ने आर के मार्बल का उदाहरण दिया

धर्म

आध्यात्मिक हो या लौकिक दोनों प्रकार की उपलब्धियों के लिए स्थिरता जरूरी है प्रमाण सागर महाराज महाराज श्री ने आर के मार्बल का उदाहरण दिया
भोपाल
“आध्यात्मिक हो या लौकिक दोनों प्रकार की उपलब्धियों के लिये स्थिरता जरुरी है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने अवधपुरी में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किये।

 

 

उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य को करने के लिये मन की स्थिरता बहुत जरुरी है,चंचल मन कभी सफलता हांसिल नहीं कर सकता संसार में दोनों तरह के लोग दिखाई देते है, कुछ लोगों का स्वभाव, प्रवृति,निर्णय और संकल्प स्थिर दिखाई देते है,तो कुछ लोग ऐसे भी होते है वह कब क्या कर दें, क्या कह दें, उनकी प्रवृति उनके मिजाज,उनके निर्णयों का कोई ठिकाना नहीं रहता ऐसे लोगों को एक उपमा दी गई है “बिना पेंदी का लोटा” जिधर मन हुआ लुढ़क गये ऐसे लोग अपनी जिंदगी में कभी कुछ हासिल नहीं कर पाते।

 

मुनि श्री ने कहा कि अपने अपने मन को टटोलिये? मुनि श्री ने कहा कि जितने भी सफलतम लोग है चाहे वह लौकिक जगत के हों या परमार्थिक जगत के हों देखना वह स्थिर होंगे,जिनका दिमाग पीपल के पत्ते की तरह हवा के रूख के समान बदलता है ऐसा व्यक्ती कोई भी कार्य को पूर्ण नहीं कर सकता।

 

उन्होंने आर के मार्बल का उदाहरण देते हुये कहा कि “स्थिरता से ही दृढ़ता आती है और दृढ़ता से ही उपलब्धियां हासिल होती है” मुनि श्री ने कहा कि गुरुदेव को देखिये उन्होंने जो भी कार्य किया वह दृढ़ संकल्प के साथ स्थिर होकर किया।

 

उन्होंने अस्थिरता के कारणों पर विचार प्रकट करते हुये कहा कि कहा जाता है कि एक व्यक्ति के जीवन में साठ हजार विचार आते है कुछ लोग होते है,जो उन अनियंत्रित विचारों में ही घूमते और दौड़ लगाते रहते है मुनि श्री ने कहा कि विचार तो आएगे लेकिन उन विचारों में अपनी प्राथमिकता प्रदान कर उनको स्थिरता दो नहीं तो आप घड़ी के पेंडूलम की तरह डोलते रह जाएगे जिंदगी में कुछ भी हांसिल नहीं हो पाएगा।

 

मुनि श्री ने कहा कि मन भटकने का कारण मन की अस्थिरता है यदि आप बार बार अपने व्यापार को बदलोगे तो नुकसान पर नुकसान होगा मुनि श्री ने कहा कि कोई भी कार्य करो इधर उधर जंहा तहा की सलाह पर मत करो अपने आत्मविश्वास के साथ आपने जो कार्य प्रारंभ किया है उस पर दृढ़ रहो धैर्य रखो सफलता मिलेगी उन्होंने कहा कि परिस्थिति जन्य मत बनों परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाओ। भाग्य भी उनका साथ देता है जो अपने निर्णय में स्थिर होते है।

प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 99297473120

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