जबलपुर के इतिहास में पहली चांदी के तीन रथ एवं 122 चांदी की पालकी में प्रमाण सागर महाराज सानिध्य में निकलेगी श्रीजी की शोभायात्रा
जबलपुर
परम पूज्य मुनिश्री 108 प्रमाण सागर महाराज संघ सानिध्य में 8 फरवरी रविवार को जबलपुर के इतिहास में पहली चांदी के तीन रथ एवं 122 चांदी की पालकी में प्रमाण सागर महाराज सानिध्य में श्रीजी की शोभायात्रा निकलेगी।
“भगवान की भक्ती से विषयों का अनुराग घटता है,यह कर्म निर्जरा का सबसे बड़ा साधन है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने संस्कृत भाषा में निवद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के सांतवे दिवस धर्मसभा में व्यक्त किये।

मुनि श्री ने कहा कि आप लोग”त्याग,तपस्या,वृत,उपवास,दान,पूजा नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं, लेकिन भगवान का नाम तो ले सकते हो,यदि आपने मन से भगवान का नाम ले लिया तो भी आपका जीवन तर जायेगा”उन्होंने कहा कि भगवान का नाम मात्र ही हमारे कर्म क्षय का कारण बनता है,जैसे जैसे अर्घ बढ़ रहे है वैसे वैसे आपकी भक्ती बढ़ रही है,और भगवान के नाम का स्मरण हो रहा है,और आपके कर्म झड़ रहे है।

मुनि श्री ने कहा कि आपका उत्साह बता रहा है कि आप लोगों को इस संस्कृत भाषा के विधान में आनंद आ रहा है..मुनि श्री ने कहा कि यह मनुष्य पर्याय की दुर्बलता है कि भगवान का नाम लेते लेते देह चिंता भी सताती है! भगवान से प्रार्थना करो कि जब में आपकी शरण में आऊँ तो मैं आपका बन जाऊँ, भाव विशुद्धी युक्त अनुराग का नाम ही तो भक्ती है “भक्ती” तो परम प्रेम रुपा अमृत के समान है।


उन्होंने कहा कि सांसारिक प्रेम परिस्थितियों के अनुसार घटता बढ़ता रहता है,लेकिन भगवान के प्रति जो प्रेम करता है वह पवित्र प्रेम यदि एक बार चढ़ जाये तो वह फिर उतर नहीं सकता उन्होंने कहा कि भगवान से प्रार्थना करो भले ही यह विधान समाप्त हो जाये लेकिन आप कुछ ऐसा जादू कर दो कि जो भक्ती का रंग इन आठ दिनों में मेरे ऊपर चढ़ा है वह चढ़ा रहे,और में सिर्फ सिर्फ आपका ही बन कर रहूं,
मुनि श्री ने कहा कि जब भगवान के प्रति राग बढ़ता है तभी हमारी भक्ती सार्थक होती है,और विषयों से अनुराग घटता है,मुनि श्री ने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा कि आप लोगों में भगवान की भक्ती नही है,भक्ती तो है,
लेकिन भगवान से कही अधिक अनुराग अन्य वस्तुओं से है, उन्होंने कहा कि “एक भक्त भगवान के पास आया और बोला भगवन् में आपसे बहूत प्रेम करता हुं,लेकिन
आप मेरे से प्रेम क्यों नहीं करते?”भगवान ने प्रकट होकर कहा कि मैं तुझसे प्रेम करने को तैयार हुं, लेकिन तुम पहले तय कर लो कि तुम सिर्फ मुझसे प्रेम करते हो किसी और से नहीं”उन्होंने कहा कि जिस दिन तेरा समग्र प्रेम मुझ पर केंद्रित हो जाएगा में तुझे अपना लूंगा। मुनि श्री ने कहा कि भगवान भी देख रहे है कि तुम मुझसे प्रेम नहीं सिर्फ प्रेम का नाटक करते हो जिस दिन तुम्हारा प्रेम भगवान के प्रति समर्पित हो जाएगा तो वह भी तुम्हें अपना लेगा।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं स्थानीय प्रचार मंत्री सुबोध कामरेड ने बताया
8 फरवरी रविवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन होंने जा रहा है। इस अवसर प्रातः9 बजे से भगवान जिनेन्द्र देव की शोभायात्रा टेलीग्राफ ग्राउंड से प्रारंभ होगी जो कि जबलपुर के इतिहास में पहली बार होगी इसमें चांदी के तीन रथ एवं 122 चांदी की पालकी में श्री जी विराजमान होंगे जिसे सभी भक्त श्रद्धालु अपने कांधे पर ले जाएगे।इस शोभायात्रा में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज मुनि श्री संधानसागर महाराज क्षु. श्री आदर्श सागर,क्षु.श्री समादर सागर क्षु.श्री चिद्रूप सागर क्षु.श्री स्वभाव सागर महाराज ससंघ सानिध्य में प्रातः9 बजे से प्रारंभ होगा यह यात्रा गढ़ाफाटक, बड़ा फुहारा लार्डगंज थाना सुपर मार्केट, गोलवाजार,रानीताल चौक से होती हुई कार्यक्रम स्थल टेलीग्राफ ग्राउंड पर आयेगी श्री दि.जैन पंचायत सभा,धर्मप्रभावना समिति, जैन नवयुवक सभा,राष्ट्रीय जैन युवा महासंघ के समस्त पदाधिकारियो ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से अपील की है कि इस धर्मयात्रा में आप सभी भाग लेकर पुण्य अर्जित करें।प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया संघस्थ मुनि श्री संधानसागर महाराज ने उत्कृष्ट साधना करते हुये कैशलोंच किया एवंउनका उपवास रहा प्रातः6:30 बजे से भगवान का अभिषेक एवं मुनि श्री के मुखारविंद से शांतिधारा संपन्न हुई एवं मांगलिक क्रिआओं के पश्चात विधान प्रारंभ हुआ एवं512 अर्घ मुनि श्री के मुखारविंद से भगवान की भक्ती करते हुये अर्पित किये गये शनिवार को भगवान के1008 नाम के साथ 1024 अर्घ समर्पित किये जायेंगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
