चेतन रत्नो की खान बागीदौरा नगरी… आचार्य श्री आर्जवसागर जी
आचार्य श्री का हुआ मंगल विहार
बागीदौरा
बागीदौरा से तारंगा जी सिद्धक्षेत्र की ओर विहार करते हुए बागीदौरा में अंतिम प्रवचन के दौरान आचार्य श्री आर्जवसागर जी महाराज नें अपनी मंगल प्रवचन के दौरान धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस जगत में गुरुओं का उपकार बहुत महान है।गुरु तो सबके नगर, सबके सामने आते हैं और सबका उद्धार चाहते हैं।आपको धर्म मार्ग में बढ़ने हेतु गुरु रुपी निमित्त तो मिलता है लेकिन पुण्य रूपी उपादान नहीं मिल पाता।
आपकी इस बागीदौरा नगर से भी अनेक भव्य लोग मोक्ष पथ पर निरंतर चल रहे हैं।और मुनि, आर्यिका, ऐलक, क्षुल्लक, प्रतिमाधारी व्रती आदि बनकर जीवन को महान बना रहे हैं।और जैन धर्म की परंपरा को आगे बढाकर जैन धर्म की प्रभावना कर रहे हैं।। देव शास्त्र गुरु हमें सम्यकदर्शन के लिए निमित्त होते हैं।गुरु चलते-फिरते तीर्थ हैं; जो मोक्षपथ की राह बताते हैं।वीतराग,सर्वज्ञ, हितोपदेशी ही हमारे भगवान हैं।

आचार्य श्री ने और भी कहा कि बंधुओ!निमित्त के साथ उपादान भी जरूरी है। जैसे मिट्टी अगर चिकनी ना हो तो वह घड़ा नहीं बन सकती।भले वहां पर कुंभकार हो, चाक हो आदि सभी सभी निमित्त क्यों ना हो…लेकिन अगर चिकनी नहीं है तो वह घड़ा रूप नहीं ले सकती।


इसी तरह सम्यकदर्शन के लिए भी अनेक निमितों की आवश्यकता होती है। जैसे भव्य होने के साथ-साथ सैनी,पर्याप्तक,जागृत साकार उपयोग आदि होना भी आवश्यक है।

आचार्य गुरुदेव ने भव्य का लक्षण बताते हुए कहा कि जो प्रीतिचित्त के साथ धर्म की बात को सुनते हैं वह निश्चित रूप से भव्य होते हैं। जिसे रत्नत्रय पाने की लालसा रहती है।गुरुओं का सानिध्य अच्छा लगता है वे भव्य आत्मा होते हैं। गुरु हमारा किस तरह उपकार करते हैं इसे समझाते हुए आचार्य श्री ने ॐ योग ध्यान भी कराया।

आचार्य श्री ने दोपहर की बेला में मंगल विहार किया रात्रि विश्राम उदयपुरा बड़ा में हुआ शुक्रवार की प्रातः बेला में गुरुदेव की मंगल आहारचर्या कोबा में संपन्न होगी।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
