दीक्षार्थी ने कर पात्र में आहार लिया ,गणधर वलय विधान की पूजन की।पारसोलापंचम पट्टाघीश वात्सल्य वारिघि आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज अपने संघ सहित पारसोला सन्मति भवन में विराजित है।धर्मनगरी पारसोला में सुबह से लेकर दिन भर धर्म की गंगा प्रवाहित होती रही ।प्रातः ळकाल दीक्षार्थी प्रेम ळकुमार ने जिन मंदिरों में दर्शन कर श्रीजी का पंचामृत अभिषेक,पूजन किया। इसके बाद दीक्षार्थी ने सभी साधुओं को आहार देने के बाद कर पात्र में आहार लिया।दोपहर को दीक्षार्थी प्रेमकुमार ने आचार्य वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में गणघर वलय विधान की पूजन कर 64 रिद्धि मन्त्रों के प्रथम वलय में 8, दुसरे वलय में 16 , तथा तीसरे वलय में 24 कुल 48 अर्घ समर्पित किए। दीक्षार्थी परिवार द्वारा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की पूजन भक्तिभाव पूर्वक की गई ।जयंतीलाल कोठारी अध्यक्ष दशा हुमड समाज तथा ऋषभ पचौरी अध्यक्ष चातुर्मास समिति ने बताया कि 21 अक्टूबर को श्यामा वाटिका में दीक्षार्थी की शोभायात्रा जावेगी सुबह 10.30 वजे दीक्षा संस्कार प्रारंभ होंगे।राजेश पंचोलिया अनुसार पारसोला और आचार्य श्री का तीन के अंक के अंकों का विशेष संबंध है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का यह तीसरा वर्षायोग है। इसके पूर्व सन् 1990 में ,सन 1997 में ,और वर्ष 2024 में तीसरा वर्षायोग कर रहे हैं ।इसी प्रकार आचार्य श्री के तीन आचार्य पदारोहण पारसोला में सन 1990 ,वर्ष 2004 तथा वर्ष 2024 तीन बार हुए।आचार्य श्री ने पारसोला में अभी तक तीन बार संलेखना समाधि सन 1997, वर्ष 2002 तथा वर्ष 2004 में कराई ।आचार्य श्री द्वारा पारसोला में तीसरी बार दीक्षा समारोह में दीक्षा दी जा रही है आचार्य पद प्राप्ति के बाद सन







1990 में दो दीक्षाएं दी गई, फिर वर्ष 2024 में तीन दीक्षाएं दी गई अब वर्ष 2024 अक्टूबर माह में पुनः दीक्षाएं दी जा रही है।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
