अच्छी पत्नी, अच्छी संतान और अच्छे मित्र सौभाग्य से मिलते हैं: आचार्य पुलक सागर
सागवाड़ा
नगर के ऋषभ वाटिका में सकल दिगम्बर जैन समाज के संयोजन में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में राष्ट्र संत आचार्य पुलक सागर महाराज का उद्बोधन भावनाओं औरआध्यात्मिक चेतना से ओतप्रोत रहा।
आचार्य श्री ने कहा कि प्रकृति की भावना के अनुरूप चलना और गुरु आज्ञा को सर्वोपरि रखना ही। जीवन का सार है। उन्होंने कहा कि “जीवन उनकी बाती है,उनका ही तेल है, मैं उसी में जी रहा हूं।जीवन में जो कभी नहीं सोचा था, वह भी गुरु आज्ञा से करना पड़ा।” आचार्य ने जिन शरणम तीर्थ की भव्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां स्थापित भगवान पार्श्वनाथ प्रभु की अलौकिक और मनोहारी प्रतिमा अत्यंत दर्शनीय है। 


आठ वर्षों की सतत साधना, परिश्रम और भक्तों के समर्पण से यह भव्य तीर्थ पूर्ण रूप से तैयार हुआ व प्राण-प्रतिष्ठा भी संपन्न हुई। महोत्सव के दौरान आचार्य ने कहा कि जिन शरणम कानिर्माण उनके लिए एक स्थायी स्मृति बन गया


है। महोत्सव के दौरान भक्त दिनेश खोड़निया व उनके पुत्र आदिश को ज्ञान गंगा से जुड़े जिन शरणम तीर्थ के लिए स्थाई ट्रस्टी पद प्रदान किया गया। मंच से उन्हें आशीर्वाद देकर सम्मानित किया गया। साथ ही भक्त अजीत कोठारी एवं परिवार को भी जिनशरणम तीर्थ में स्थाई सदस्यता प्राप्त होने पर सम्मानित किया गया।
आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में दोस्ती पर विशेष विचार रखते हुए कहा कि “रिश्तों के बाजार में सब कुछ बिकता है विश्वास, प्रेम, संबंध, लेकिन दोस्ती कभी नहीं बिकती सच्ची मित्रता विश्वास पर टिकी होती है, उसमें न गद्दारी होती है और न ही धोखा।” उन्होंने कहा कि सौभाग्य से जीवन में तीन चीजें मिलती हैं अच्छी पत्नी, अच्छी संतान और अच्छे मित्र ।
जहां पत्नी और संतान प्रकृति व संस्कारों देन हैं, वहीं मित्र का चयन मनुष्य स्वयं करता है। पत्नी जीवन की सच्ची साथी होती है, जो कठिन समय में भी पुरुष का साथनिभाती है। उन्होंने रामायण का उदाहरण देतेहुए माता सीता के चरित्र, त्याग, समर्पण और सत्यनिष्ठा पर प्रकाश डाला।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
