आत्मविश्वास रावण जैसा नहीं होना चाहिए भावसागर महाराज

धर्म

आत्मविश्वास रावण जैसा नहीं होना चाहिए भावसागर महाराज
जरुआखेड़ा
आचार्य श्री 108 समय सागर महाराज के आज्ञानुवर्ती मुनिश्री 108 विमल सागर महाराज, मुनिश्री 108 अनंत सागर महाराज,मुनिश्री 108 धर्मसागर महाराज, मुनिश्री 108 भावसागर महाराज का पद विहार चल रहा है।

 

 

3 जुलाई को प्रातः बेला में महाराज श्री संघ का मंगल आगमन होगा 4 जुलाई को खुरई नगर में मंगल प्रवेश की संभावना है। एवं कुछ दिन खुरई नगर में प्रवास रहने की संभावना है। मंगलवार की बेला में अपने मंगल प्रवचन में बोलते हुए मुनि श्री विमल सागर महाराज ने धार्मिक संस्कारों का महत्व बताया।

 

 

 

 

मुनिश्री 108 भावसागर महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि आत्मविश्वास तो विभीषण की तरह होना चाहिए, विभीषण का ऐसा भाव था कि हम निर्बल हैं, मगर ईश्वर हमारे साथ है और हमारी शक्ति अनंत है।

महाराज श्री ने कहा कि आत्मविश्वास रावण जैसा नहीं होना चाहिए, जो समझता था कि मेरे बराबर कोई है ही नहीं। उन्होंने कहा कि यदि आपके पास राय के दाने के बराबर भी आत्मविश्वास है तो फिर कोई भी कार्य संभव नहीं है। महाराज श्री ने आत्मविश्वास का अर्थ समझाते हुए कहा कि आत्मविश्वास का अर्थ है अपने काम के प्रति अटूट श्रद्धा होना। आत्मविश्वास में अद्भुत शक्ति है, जिससे मनुष्य हजारों विपत्तियों का सामना अकेले कर सकता है। निर्धन मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति और मित्र उनका विश्वास ही है। धनहीन होते हुए भी कितने ही मनुष्यों ने ऐसे कार्य किए हैं, जो धनवान मनुष्य भी नहीं कर पाए। जिस कार्य को एक मनुष्य कर सकता है, उसी को यदि दूसरा न कर सके तो समझो कि उसमें आत्मविश्वास की कमी है। मानव की सबसे बड़ी शक्ति संकल्प शक्ति है और सबसे बड़ा सहायक आत्मविश्वास है।

 

 

 

महाराज श्री ने कहा कि जिस मनुष्य में आत्मविश्वास नहीं है, वह शक्तिमान होकर भी कायर है और पंडित होकर भी मूर्ख है, आत्मविश्वास पराक्रम का सार है। अपने ऊपर विश्वास रखें यह विश्वास ही अटूट तार है। और जबरन आपको हाथ पकड़ कर उन्नति के सोपान चढ़ाएगा। स्वयं उठिए, आत्मविश्वास रूपी मित्र का हाथ थामिए और चल पढ़िए।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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