पारसनाथ आदिवासी व जैन समाज दोनों के लिए आस्था का
प्रतीक है। वहां की पवित्रता को भंग होने नहीं दी जाए।
पारसनाथ
पारसनाथ स्थित मरांग बुरु दिशोममांझी थान में पूजा के समय पशुबलि का वायरल फोटो मामले में विवाद को अनुमंडल प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। मधुबन पारसनाथ के बढ़ते विवाद को संज्ञान में लेते हुए शुक्रवार कोमधुबन गेस्ट हाउस में त्रिपक्षीयबैठक अनुमंडल पदाधिकारी ने बैठक की
बैठक में मुख्य रूप से भूमिउपलेख समाहर्ता डुमरी, बीडीओ पीरटांड़, मधुबन थाना प्रभारी,पीरटांड़ प्रमुख, मधुबन मुखिया,उपमुखिया के साथ मधुबन जैन संस्था के प्रबंधक मधुबन जैन समाज के अध्यक्ष व मरांग बुरु संस्था व मरांग बुरु बैसि केआदिवासी समाज के लोग शामिल हुए बैठक के बाद दोनों समाज के लोग। बैठक में कहा गया कि पारसनाथ आदिवासी व जैनसमाज दोनों के लिए आस्था का प्रतीक है। वहां की पवित्रता को भंग होने नहीं दी जाए। अहिंसा के जयघोष करने वाले भगवान पार्श्वनाथ की सर्वोच्च शिखर पारसनाथ की पवित्रता को बनाएर रखने में जैन समाज व आदिवासी समाज दोनों मिलकर ताल मेल बनाकर कर काम करें।बैठक में शामिल आदिवासी संथाल समाज के वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी संथाल समाज की पूजा पद्धति में बलि महत्वपूर्ण है।बावजूद समाज द्वारा पूजा स्थल में पूजा के समय बलि देने की कोई मंशा नहीं थी। पूजा के समय बस औपचारिकता की गई। बाद में एक सोची-समझी साजिश के तहतकुछ लोगों ने इस घटना को अंजाम देते हुए फोटो को वायरल किया, जिसकी आदिवासी समाजने निंदा की। बैठक में उपस्थित जैन समाज के प्रतिनिधि को आदिवासी समाज ने आश्वस्त किया कि ऐसा कोई भी कार्य नहींकिया जाएगा, जिससे उनकी आस्था को ठेस पहुंचे।अनुमंडल पदाधिकारी शहजाद परवेज ने कहा कि प्रशासन आदिवासी समाज व जैन समाज दोनों की ही आस्था को नमन करते हैं। जो भी व्यक्ति सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने का काम करेंगे, उसके खिलाफ प्रशासन कड़ी करवाई करेगा। कहा कि


पिछले कुछ दिनोंसे पारसनाथ को लेकर देश भर में विभिन्न प्रकार के विवाद को तुल दिया जा रहा है। यही वजह है कि आज आदिवासी संथाल समाज व जैन समाज दोनों को एक साथ बैठाकर आपसी विवाद को निपटाते हुए आगामी 11 अगस्त को होने वाले भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस की तैयारी करें।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
