चकडोल यात्रा आज • आचार्य वर्धमानसागर के श्रीसंघ में शामिल थीं, शीतकालीन प्रवास चल रहा था, निवाई में जैन संत की यह सातवीं समाधि निर्जल – निराहार उपवास के 9वें दिन आर्यिका शीतल मति ने देह त्यागी

धर्म

चकडोल यात्रा आज • आचार्य वर्धमानसागर के श्रीसंघ में शामिल थीं, शीतकालीन प्रवास चल रहा था, निवाई में जैन संत की यह सातवीं समाधि निर्जल – निराहार उपवास के 9वें दिन आर्यिका शीतल मति ने देह त्यागी

निवाई।

आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर महाराज के श्रीसंघ में विराजित  आर्यिका 105 शीतल मति माताजी का शनिवार शाम 6 बजे समाधिमरण हो गया। उन्होंने 9 दिन से भोजन-पानी का त्याग कर रखा था। रविवार को उनकी चकडोल यात्रानिकाली जाएगी। वे आचार्य श्री संघ में शीतकालीन प्रवास  में विराजमान थी।

 

आपको बता दे  आचार्य के श्रीसंघ से पांच महीने में यह पांचवीं समाधिः है इससे पहले टॉक स्थित अमीरगंज जैन नसिया में चातुमांस के दौरान मुनि विशाल सागर महाराज, मुनि चिन्मय सागर महाराज, क्षुल्लकशील सागर महाराज की समाधि हो चुकी है। 6 नवंबर कोआर्यिका वत्सल मति की चौथी समाधि टोंक में हुई थी। आचार्य वर्धमान सागर के शिष्य मुनि मर्यादा सागर की समाधि दिसंबर वर्ष 2022 में हुई थी।

 

निवाई से 9 जैन संत बने

1 समाधिस्थ मुनिश्री 108विनम्र नंदी

2 आर्यिका105 पूर्णिमामति माताजी 

•3 आर्यिका105 गंभीरमति माताजी 

• 4 आर्यिका 105 जयश्री माताजी 

5 आर्यिका105 ज्ञापन श्री माताजी 

6 आर्यिका 105ज्ञापक श्री माताजी 

7 आर्यिका भक्ति भारती माताजी

8 क्षुल्लक 105शुभसागर महाराज 

•9 क्षुल्लिका 105शुद्ध कुंदनमति माताजी 

.

माताजी के अंतिम वचन…

संघ में 60 साल हो गए हैं. किसी से राग-द्वेष, कषाय, मोह, गलती हुई तो क्षमा-याचना28 साल की उम्र में साध्वी बनी थीं शीतल मति लौकिक शिक्षा चौथी द्वितीय पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 अजीत सागर महाराज के समय 28 वर्ष की उम्र में साध्वी बनीं थीं  पति व्यापार करते थे

सामान्य परिचय

सांसारिक गांव गामड़ी जिला डूंगरपुर सांसारिक माता झकु देवीसांसारिक पिता न्याल चंद धाटलिया सांसारिक नाम गेंदी देवीजन्म 1943:आर्यिका श्रीज्ञानमती जी की प्रेरणा से संघ में शामिल हुई। आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत और 2 प्रतिमा के नियम आचार्य शिवसागर से ग्रहण किए। दीक्षागुरु आचार्य श्रुत सागर से1971 में क्षुल्लिका और सन 1972 में आर्यिकादीक्षा लेकर आर्यिका श्री शीतल मति हुई। माताजी ने  उपवास लेने से पहले गुरु को याद किया। संक्षिप्त उद्बोधन में सभी पूर्वाचार्यों, दीक्षागुरु आचार्य श्रुतसागरको याद करते हुए कहा कि मैं आचार्य शिवसागर जी के समय से संघ में हूं।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संलेखना भावना रूपी नैया पार करा दो। अगले आहारमें मात्र जल ही लूंगी संघ में 60 वर्ष होगए हैं। किसी के प्रति राग-द्वेष, कषाय, मोह उत्पन्न हुआ हो, कोई गलती हुई हो तोआचार्यश्री एवं समस्त साधुओं सहित सबसेक्षमा याचना करती हूं। आचार्य पद पर आचार्य श्री को 36 साल हो गए हैं। गुरुवरके सान्निध्य में मेरी समाधि हो। आत्मा कीउन्नति हो। आचार्य श्री मुझे क्षमा करें।

  संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *