हर परिस्थिति में जो शांत है वही संत है : आचार्य श्री पुलक सागर महाराज
सागवाड़ा
पलकों को झुकाकर जियो, तो दुनिया तुम्हें पलकों पर बैठा देगी।अधिक अकड़ के साथ जीवन जीने के बजाय झुककर जीना शुरू करो। जो झुकता है वही जीवन में ऊपर उठता है, और जो अधिक अकड़ता है वह जड़ से कट जाता है।
यह विचार राष्ट्रसंत आचार्य पुलक सागर जी महाराज ने ऋषभ वाटिका में सकल दिगंबर जैन समाज सागवाड़ा के संयोजन। में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव के पांचवें दिन शनिवार को श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आचार्यश्री ने कहा कि जो शांत है वही संत है और जो अशांत है वह समाप्त हो जाता है। उन्होंने हाथ की दस उंगलियों का उदाहरण देते हुए कहा कि हथेली में सबसे छोटी उंगली अंत में होती है, लेकिन जब परमात्मा के दर्शन के लिए हाथ जोड़ते हैं,तो वही उंगली भगवान के सबसे सामने होती है। 


आचार्य श्री ने कहा कि जिसका स्वभाव अच्छा होता है, उसका भविष्य भी अच्छा होता है। व्यक्ति को बदलने केलिए पहले अपने व्यवहार। परिवर्तन लाना आवश्यक है।बड़ा बनने के लिए सर्वस्व समर्पण करना पड़ता है। परिवारमें यदि सभी सदस्य अहंकार का त्याग करें, तो परिवार में स्वतः ही शांति स्थापित हो जाती है।


सभा से पूर्व अतिथियों ने दीपप्रज्वलन किया। आचार्य पुलकसागर जी का पाद प्रक्षालन कीर्तिभाई शाह परिवार द्वारा किया गया। सीमा जैन एवं पिंकीजैन, बांसवाड़ा ने जिनवाणी भेंट की। कार्यक्रम में नगर सहितआसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु उपस्थित थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
