त्रिदिवसीय कार्यक्रम अंतर्गत 27 जनवरी को विषापहार मंडल विधान एवं विश्व शांति हेतु महायज्ञ हवन हुआ।

धर्म

त्रिदिवसीय कार्यक्रम अंतर्गत 27 जनवरी को विषापहार मंडल विधान एवं विश्व शांति हेतु महायज्ञ हवन हुआ।
अशोक नगर
आचार्य श्री सुमतिसागर जी की शिष्या गणिनी आर्यिका 105 श्री सृष्टिभूषण माताजी ,श्री विश्वयशमति माताजी ,श्री विमल मति एवं क्षुल्लिका 105 श्री आप्त मति माताजी अशोकनगर में विराजित है। दिगंबर जैन पंचायत एवं जैन समाज अशोकनगर के तत्वाधान में तीन दिवसीय कार्यक्रम 26 जनवरी से 28 जनवरी तक मनाया जा रहा है। जिसमें 1008 श्री आदिनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव महामंडल विधान, श्री जी की रजत रथ यात्रा , आर्यिका संघ के प्रवचन ,आर्यिका 105 श्री सृष्टिभूषण माताजी ka पीछी परिवर्तन तथा विश्व शांति हेतु महायज्ञ हवन एवं रात्रि को सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस अवसर पर 27 जनवरी को श्री जी के अभिषेक पूजन के पश्चात विधानाचार्य मुकेश भैया के निर्देशन में 27 जनवरी को धार्मिक मंडल विधान की पूजन विभिन्न सौभाग्यशाली परिवारों द्वारा की गई इसके पश्चात विश्व शांति हेतु महायज्ञ हवन हुआ।

 

 

आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी ने विधान के दौरान समर्पित किए जाने वाले अर्ध का मंत्रोच्चार कर प्रवचन में बताया कि जैन धर्म के मंत्रों में बहुत शक्ति है चाहे भक्तामर स्तोत्र पाठ हो

जिसमें 48 कमरों में बंद श्री मानतुंग आचार्य भक्तामर स्तोत्र की रचना से कैद से मुक्त हुए ।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की शांति भक्ति पाठ करने से नेत्र ज्योति वापस प्राप्त हुई,

इसी प्रकार विषापहार स्रोत की रचना हुई धनंजय कवि मंदिर में पूजन कर रहे थे तभी घर से सूचना मिली कि उनके पुत्र को सांप ने डस लिया ,किंतु वह भगवान की भक्ति पूजन करते रहे , घर नहीं गए। पत्नी ने सर्प से ग्रसित मरे हुए पुत्र को उनकी गोदी में डाल दिया ।

पूजा से निवृत होने के बाद धनंजय कवि ने भगवान की भक्ति करते हुए कहा कि मैं आपकी भक्ति में लीन हूं और उन्होंने विषापहारस्रोत की रचना की जिसमें भगवान का गुणानुवाद किया ,जैसे-जैसे 40 छंदों की रचना पूर्ण हुई वैसे-वैसे पुत्र का सर्प का जहर उतर गया और पुत्र स्वस्थ अवस्था में आ गया।
28 जनवरी को प्रात श्री जी के अभिषेक पूजन के पश्चात रजत रथ यात्रा नगर के प्रमुख मार्गो से निकाली जावेगी जुलूस का समापन वापस दिगंबर जैन मंदिर में होगा जहां श्री जी के अभिषेक के पश्चात 1008 श्री आदिनाथ भगवान का निर्वाण लाडू पुण्यशाली परिवार द्वारा चढ़ाया जाएगा।

इसके पश्चात आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माता जी का पीछी परिवर्तन और प्रवचन होगा।
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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