आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनि श्री योगसागर महाराज सानिध्य में मनाया गया आचार्य श्री के प्रकल्पों की प्रस्तुति ने सभी का ध्यान अपनी और खींचा 

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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मुनि श्री योगसागर महाराज सानिध्य में मनाया गया आचार्य श्री के प्रकल्पों की प्रस्तुति ने सभी का ध्यान अपनी और खींचा 

रामगंजमंडी 

 परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज का द्वितीय समाधि दिवस निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 योगसागर महाराज संघ सानिध्य में मनाया गया कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया जो श्रीमान सुरेश कुमार सिद्धार्थ कुमार जैन बाबरिया दोतडा वाला परिवार द्वारा किया गया उन्हें महाराज श्री को शास्त्र भेट करने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके साथ ही श्री सुरेंद्र जैन शुभम कुमार सागर वालों को भी शास्त्र भेट का सौभाग्य प्राप्त हुआ 

 

कार्यक्रम में मंगलाचरण स्वरा जैन द्वारा किया गया जो सभी को भाव विभोर कर गया। इसके उपरांत आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज की पूजन विशेष थाल सजाकर अष्ट द्रव्य से पूजन की गई।

 

 इस, अनुपम बेला में पूरा पंडाल भक्तो से भरा हुआ था।

   इन मांगलिक क्षणों में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के प्रकल्प गौशाला, इंडिया नहीं भारत बोलो, स्वालंबन के लिए हथकरघा इंडिया नहीं भारत बोलो को नाटकीय रूपांतरण के द्वारा दर्शाया गया जो सभी का मन मोह गई।

 

इस अनुपम बेला में दूर दराज के भक्त भी पधारे साथ ही मीडिया भी मौजूद रही। जैन श्वेतांबर श्रीसंघ अध्यक्ष राजकुमार पारख एवं श्री रूपचंद लाडवा ने भी महाराज श्री संघ के चरणों में श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

   इसके बाद गणिनी आर्यिका 105 संगममति माताजी उन्होंने कहा आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के विषय में बताया आचार्य श्री के प्रति बच्चों में भी श्रद्धा विद्धमान है वे कहते हैं बीमार है आचार्य श्री का नाम लेंगे ठीक हो जाएंगे। 

     निर्भीक सागर महाराज ने कहा आचार्य श्री साधना के हिमालय थे जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं।

एक गीत के माध्यम से कहा 

गुरु मात पिता गुरु बंधु सखा तेरे चरणों में कोटि कोटि प्रणाम।

पूज्य निरामय सागर महाराज ने कहा आचार्य श्री भेद विज्ञानी अध्यात्म के सरोवर थे।

निर्मोह सागर महाराज ने कहा हमारे जो भी थे वही थे जो कुछ छोड़ा था उन्हीं के लिए छोड़ा था उनकी पूर्ति नहीं हो सकती गुरु मिट्टी से सोना बनाते हैं गुरु के प्रति सच्ची आस्था श्रद्धा है गुरु कही भी बिठा सकता। गुरु हमारे लिए जीवंत भगवान थे।

 

पूज्य मुनि श्री निरोग सागर महाराज ने आचार्य श्री ने कहा जीवन लग जाए तभी भी हम गुणमाला नहीं लिख पाएंगे। आचार्य श्री शारीरिक दृष्टि से हमारे बीच नहीं लेकिन आत्मा से हमेशा जुड़े रहेंगे आचार्य श्री ने अपनी चर्या मे दोष नहीं लगे और किसी के दोष नहीं दिखे।

 

 

 

पूज्य मुनि श्री योगसागर महाराज ने कहा मुझे हर्ष हो रहा है कि आचार्य परंपरा में साधु बना मैं नहीं सोच सकता था। गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि आत्म कल्याण गुरु की आज्ञा अनुपालन में है। जब में गृहस्थ अवस्था में था 5 साल का था तब उन्होंने मुझे नमोकर मंत्र सिखाया इसीलिए आचार्य श्री 65 साल से मेरे धर्म गुरु ह। गुरु आज्ञा बड़ी चीज है इसी से नैया पार होगी।

    अभिषेक जैन लुहाड़िया 

रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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