जीवन में समृद्धि,संस्कृति,संस्कार और धर्म की होना चाहिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
निवाई
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित निवासी विराजित है प्रतिदिन अनेक नगरों से भक्त गुरुदेव के दर्शन कर अपने अपनें नगर पधारने का निवेदन कर रहे हैं श्री पार्श्वनाथ जैन नसीया में संत भवन में आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि जिस प्रकारबीजारोपण करने के बाद उसे पानी, खाद देकर उसकी सुरक्षा करते हैं तब वह वृक्ष बनता है इसी प्रकार बालक को भी धर्म , देखरेख ,संस्कृति संस्कार से संस्कारित करना होता है तब उसके जीवन का निर्माण होता है। यह मंगल देशना पाठशाला शिक्षक अधिवेशन के अवसर पर धर्म सभा में प्रगट की ।राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि शिक्षा अनेक शाला से प्राप्त होती हैं। निवाई में सुखद अनुभूति हुई बालक की उम्र 8 वर्ष होने पर उसने पिता मंदिर साथ लाए और श्री जी का अभिषेक किया। मंत्रों में शक्ति होती हैं मंत्र प्रगति, और विकास का यंत्र है व्यक्ति को सोच हमेशा सकारात्मक रखना चाहिए। जीवन में समृद्धि धर्म और संस्कार की होना चाहिए। बच्चों में भगवान के दर्शन,अभिषेक,पूजन और स्वाध्याय के संस्कार देने से जीवन सुरक्षित होता हैं।आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री महायश मति ने धर्म सभा में बताया कि बच्चों को संस्कार माता से मिलते हैं बालक बड़ों का अनुसरण करते है इसलिए अभिभावकों को बच्चो के प्रति सकारात्मक सोच रखकर उनकी बुराई के बजाय प्रशंसा करना चाहिए।

मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने पाठशाला अधिवेशन में उपदेश में बताया कि सभी का लक्ष्म समृद्धि होता हैं,उसके लिए चार सूत्र बताए पाठशाला, संस्कृति, संस्कार और समृद्धि धर्म से धन की, पुण्य की, ज्ञान की, आत्म विश्वास की प्राप्ति होती हैं आज जैन व्यक्ति की पहचान संस्कृति से है कि जैन पानी छान कर ओर रात्रि भोजन नहीं करता हैं। आजकल खानपान और पहनावा दूषित हो रहा हैं। अर्पित लटुरिया, शुभम चवरिया, पवन बोहरा के अनुसार जिनोदय युवा संघ एवं सकल जैन समाज निवाई द्वारा आयोजित कार्यशाला मेंआचार्य श्री और संघस्थ साधुओ की धर्म देशना के पहले धर्म सभा में आचार्य श्री शांति सागर एवं पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण एवं दीप प्रवज्जलन राजेश झांझरी परिवार द्वारा किया गया। नृत्य मंगलाचरण आचार्य शांति सागर पाठ शाला के बच्चों ने प्रस्तुत किया।सभा का प्रभावी संचालन श्री सुरेश के शास्त्री ने किया। विभिन्न नगरों से पधारे पाठशाला के शिक्षकों ने अपने विचार व्यक्त किए गए।शिवाड़ पाठशाला के शिक्षक ने बताया प्रतिदिन बालक श्री जी का अभिषेक करते हैं। देवली पाठ शाला का विद्यार्थी विशाल जैन संस्कारित होकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर C A चार्टर्ड अकाउंटेंट बन कर अब पाठशाला में बच्चों को अध्ययन कराता हैं। इसी प्रकार टोंक,निवाई ,बनेठा, फागी, देई, पीपलू आदि नगरों की जैन पाठ शाला के शिक्षकों , विद्यार्थी उपस्थित हुए
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
