ऐतिहासिक पंचकल्याणक महोत्सव की भव्य शुरुआत 400 दिगंबर साधु–साध्वियों के आहार हेतु 50 ‘राजा श्रेयांस चौका’ नगर का लोकार्पण

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ऐतिहासिक पंचकल्याणक महोत्सव की भव्य शुरुआत 400 दिगंबर साधु–साध्वियों के आहार हेतु 50 ‘राजा श्रेयांस चौका’ नगर का लोकार्पण

औरंगाबाद | णमोकार तीर्थ, चांदवड (नाशिक)

णमोकार तीर्थ, महाराष्ट्र में आगामी 6 फरवरी से आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव की तैयारियाँ अब अपने चरम पर पहुँच चुकी हैं। इस महापर्व के पावन अवसर पर देशभर से लगभग 400 दिगंबर जैन साधु–साध्वियों का मंगल आगमन णमोकार तीर्थ में हो रहा है।

 

 

‘राजा श्रेयांस चौका नगर’— साधु सेवा का अनुपम उदाहरण

इतनी विशाल संख्या में मुनिराजों एवं आर्यिका माताजी की चर्या, शुद्ध आहार एवं संयम की मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए णमोकार तीर्थ परिसर में विशेष रूप से ‘राजा श्रेयांस चौका नगर’ का निर्माण किया गया है। इस नगर में 50 भव्य, सुव्यवस्थित एवं सर्वसुविधायुक्त चौकों की स्थापना की गई है, जो साधु सेवा की उत्कृष्ट मिसाल प्रस्तुत करता है।

चौका नगर के भव्य प्रवेश द्वार का उद्घाटन मंत्रोच्चार एवं मंगल वाद्ययंत्रों की गूंज के बीच संपन्न हुआ। उद्घाटन समारोह में दानवीर जिनेंद्रजी बाकलीवाल परिवार, उपाध्यक्ष महावीर गंगवाल, ट्रस्टी अनिल जमगे, हर्षा गंगवाल, ग्लोबल महासभा अध्यक्ष जमणालाल हपावत, उपाध्यक्ष पारस लोहाडे, माजी नगराध्यक्ष भूषण कासलीवाल, चंद्रशेखर कासलीवाल तथा बालब्रह्मचारी वैशाली दीदी ने विधिवत पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

 

बाकलीवाल परिवार को ‘सर संघाधिपति’ का सर्वोच्च सम्मान

पुणे निवासी जिनेंद्र जैन (बाकलीवाल) परिवार द्वारा 50 चौकों एवं विशेष कक्षों के निर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान को देखते हुए महोत्सव समिति द्वारा परिवार को ‘सर संघाधिपति’ के सर्वोच्च सम्मान से अलंकृत किया गया।

णमोकार ट्रस्ट की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में जिनेंद्रजी, हिरामणीजी, राजेश, रेखा, धीरज, सोनिया, विकास, सपना सहित समस्त बाकलीवाल परिवार को स्मृति चिन्ह प्रदान कर भावभीना अभिनंदन किया गया।

आचार्यों का पावन सानिध्य एवं आहार दान का महत्व

महोत्सव के पूर्व आचार्य एवं साधु–साध्वियों की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिससे संपूर्ण तीर्थ परिसर धर्ममय वातावरण से ओतप्रोत हो गया। इसके पश्चात आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री पद्मनंदिजी, विद्यानंदिजी, कर्मविजयनंदिजी, आचार्य देवनंदीजी महाराज तथा युगल मुनिश्री अमोघकीर्तिजी–अमरकीर्तिजी का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ।

आचार्य संघ ने “आहार दान की विधि एवं उसका आध्यात्मिक महत्व” विषय पर प्रेरणादायी प्रवचन दिए। मुनिश्री ने कहा—

“इतनी बड़ी संख्या में साधु सेवा का अवसर मिलना अत्यंत दुर्लभ और पुण्यशाली है। अहिंसा, संयम और सुपात्र दान ही आत्मकल्याण का मार्ग है। जिस प्रकार राजा श्रेयांस ने आदिनाथ भगवान को आहार दान देकर दान तीर्थ का प्रवर्तन किया, वैसा ही पुण्य भाव आज णमोकार तीर्थ में साकार हो रहा है।”

समाज के प्रमुख जनों की गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य अक्षयभैय्या जैन, पंचकल्याणक समिति के राष्ट्रीय प्रचार-प्रसार संयोजक पारस लोहाडे, तथा गजपंथ तीर्थक्षेत्र की ट्रस्टी मंजुषा पाटणी ने भी समाज को संबोधित किया।

कार्यक्रम में प्रचार-प्रसार संयोजक विनोद पाटणी, चौका समिति संयोजक शांतीलाल पांडे, महेंद्र दगडे, आनंद काला सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल सूत्रसंचालन पारस लोहाडे ने किया एवं ट्रस्टी रवी पहाडे ने आभार प्रदर्शन किया।

राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश एवं महाराष्ट्र से पधारे हजारों श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा णमोकार तीर्थ परिसर भक्तिरस में सराबोर हो उठा।

— नरेंद्र अजमेरा, पियुष कासलीवाल | औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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