संयम पथ के 51 वर्ष में पहली बार रामगंजमंडी आयेंगे आचार्य विद्यासागर समयसागर के सबसे बड़े शिष्य ज्येष्ठ मुनिश्री योगसागर
रामगंजमंडी
परम पूज्य ज्येष्ठ मुनि श्री निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 योगसागर महाराज का रामगंजमंडी नगर में संध्या बेला में रविवार को आगमन होगा उनकी अगवानी नगर की सीमा पर स्थित कमल फिलिंग से की जाएगी ।
उन्हें नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लाया जाएगा इसको लेकर समाज में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। जगह-जगह गुरुदेव का मंगल पद प्रक्षालन किया जाएगा।
राजस्थान में ऐतिहासिक आगमन
1979 के बाद लगभग 47 वर्षों के अंतराल में महाराज श्री का राजस्थान में पुनः मंगल आगमन हुआ है।
विशेष रूप से रामगंजमंडी नगर में यह उनका प्रथम आगमन है, जिससे नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में अपूर्व धार्मिक उल्लास और श्रद्धा का वातावरण बना है।
महाराज श्री के सानिध्य में 27 जनवरी की बेला में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का द्वितीय समाधि दिवस मनाया जाएगा।
ज्येष्ठ मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज : त्याग और तप की जीवंत प्रतिमा
ज्येष्ठ मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज दिगंबर जैन परंपरा के एक श्रेष्ठ, तपस्वी और सिद्ध साधक हैं। उनका जीवन आडंबर से दूर, कठोर संयम, शुद्ध चर्या और आत्मशुद्धि को समर्पित है। वर्तमान समय में वे दीक्षा-काल के अनुसार सबसे वरिष्ठ मुनिपदधारी हैं और “मुनि शिरोमणि” के रूप में श्रद्धापूर्वक सम्मानित हैं।


जन्म एवं पारिवारिक परिचय
महाराज श्री का जन्म 13 सितंबर 1956 (गुरुवार) को हुआ।
आपके पिता श्री मलप्पा जी जैन एवं माता श्रीमती श्रीमतीबाई जी जैन हैं। बचपन से ही उनमें वैराग्य और धर्मभाव प्रबल रहा।
संयम पथ की यात्रा
ब्रह्मचर्य व्रत : 2 मई 1975
क्षुल्लक दीक्षा : 18 दिसंबर 1975
ऐलक दीक्षा : 19 नवंबर 1977
मुनि दीक्षा : 15 अप्रैल 1980
निर्यापक पद : 8 मार्च 2019
इन चरणों से गुजरते हुए महाराज श्री ने पूर्ण दिगंबर मुनि जीवन को अंगीकार किया।
गुरु परंपरा एवं विशेषता
मुनि श्री योगसागर जी महाराज आचार्य परंपरा के महान संत आचार्य श्री विद्यासागर जी से दीक्षित हैं। योग सागर जी मुनिराज अपने दीक्षा गुरु आचार्य विद्यासागर जी और वर्तमान आचार्य समय सागर महाराज के गृहस्थ जीवन के सगे भाई है ।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312


