श्रावकों का जीवन मन,वचन,और काय के संयम और रत्नत्रय धर्म से सफल होता हैं।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

श्रावकों का जीवन मन,वचन,और काय के संयम और रत्नत्रय धर्म से सफल होता हैं।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

निवाई 23 जनवरी (राजेश पंचोलिया)

निवाई। 

केवलज्ञान लक्ष्मी से जैनधर्म विभूषित है।जैन धर्म के अंतर्गत सर्वोच्च सिद्ध अवस्था का मार्ग बतलाया गया है । अनंतानंत भव्य आत्माये इस मार्ग पर चलकर सिद्ध हुए हैं। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी ने भी समीचीन धर्म मार्ग हमें बतलाया है ।20वीं सदी में अनेक दिगंबर साधुओ ने इस मार्ग को अपना कर जीवन सफल किया है ।संयम धारण करने से जीवन सार्थक होता है। जन्म अनेक लेते हैं किंतु सभी संयम अपनाते नहीं है ।जन्म के साथ मरण भी लगा हुआ है जन्म मरण की सार्थकता सम्यक दर्शन,ज्ञान और सम्यक चारित्र की साधना कर संलेखना से मृत्युंजय मृत्यु पर विजय पाने का पुरुषार्थ से होती हैं आर्यिका श्री शीतलमति माताजी ने चोपन वर्ष पूर्ण कर आर्यिका दीक्षा ली , साधु का दीक्षा दिवस ही उनका जन्म दिवस होता है जन्म वैराग्य संयम के महान कार्यों से सफल होता है। सर्वश्रेष्ठ अवस्था सिद्ध अवस्था होती है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 83 वर्षीय आर्यिका श्री शीतल मति के चारों प्रकार आहार का त्याग कर यम संलेखना धारण करने के अवसर पर प्रगट की राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने उपदेश में आगे बताया कि श्री शीतलमति जी ने अपने मन को दृढ़ करते हुए आज बसंत पंचमी के दीक्षा दिन पर संपूर्ण चारों प्रकार के आहार का त्याग कर यम संलेखना धारण की है ।संलेखना शरीर और कषाय को क्रश करने से सफल होती है ।आज श्रावकों ने गुरुजनों की पूजा की है। पूजन करने वाला भी एक दिन पूज्यता को प्राप्त होता है ।इसलिए उत्साह और भक्ति से धर्म पुरुषार्थ करना चाहिए इससे आत्मा का कल्याण होता है और अन्य को भी संयम धारण करने की प्रेरणा मिलती है ।श्रावक का मानव जीवन मन वचन काय के संयम से सफल होता है। साधु की समाधि देखना सेवा करना तीर्थ यात्रा समान होती हैं उत्कृष्ट समाधि होने पर क्षपकसाधु अगले दो से आठ भव में निश्चित रूप से सिद्ध अवस्था को प्राप्त करते हैं। पवन बोहरा,हेमंत बाबी सुशील अनुसार संत भवन निवाई में आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी एवं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की भक्ति , उत्साह नृत्य साथ अष्ट द्रव्यों में 36 सामग्री की। आर्यिका श्री शीतल मति ने श्री जी, आचार्य श्री, सभी साधुओं, से क्षमा याचना कर क्षमा भाव धारण किया।

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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