तृतीय पट्टाचार्य धर्मशिरोमणी आचार्य श्री 108 धर्म सागर जी महाराज के 111 वे वर्षवर्धन दिवस पर भाव भीनी विनयांजली

धर्म

तृतीय पट्टाचार्य धर्मशिरोमणी आचार्य श्री 108 धर्म सागर जी महाराज के 111 वे वर्षवर्धन दिवस पर भाव भीनी विनयांजली।चारित्र चक्रवती प्रथमाचार्य श्री 108 शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण पट्ट परम्परा के तृतीय पट्टाचार्य धर्मशिरोमणी आचार्य श्री 108 धर्म सागर जी महाराज के 111 वे वर्ष वर्धन अवतरण वर्ष सन 1914 विक्रम संवत 1970 पौषशुक्ला पूर्णिमा 12 जनवरी 1914 पर भावभीनी विनयांजली में

जीवन परिचयनाम:* श्री चिरंजीलाल जी, श्रीकजोडीमल जी,जन्म दिनांक पौष शुक्ला पूर्णिमा संवत 1970 12 जनवरी सन 1914 श्री धर्मनाथ भगवान का केवलज्ञान कल्याणक के दिन गंभीरा राजस्थान में हुआ। आप पिता श्री बख्तावरमल जी,श्रीमती उमराव देवीजी की बगिया के अनमोल मोती थे। व्रत नियम आपने व्रत नियम आचार्यकल्प श्री 108 चंद्र सागर जी महाराज से 15 वर्ष की अल्प आयु मे शुद्ध जल ग्रहण करने का नियम लिया। व दो प्रतिमा व्रत का नियम आचार्य कल्प श्री 108 वीरसागर जी महाराज से इंदौर मध्यप्रदेश में लिया। वह संयम पद पथ पर बढते गए और सप्तम प्रतिमा व्रत आचार्य कल्प श्री 108 चंद्र सागर जी महाराज से बडनगर में लिया।आपने क्षुल्लक दीक्षा चैत्र कृष्णा 7 संवत 2000 को 108 आचार्य कल्प श्री चंद्र सागर जी महाराज से बालूज, महाराष्ट्र में हुई। और आपका नाम क्षुल्लक श्री 105 भद्र सागर जी महाराज से रखा गया। आपकी ऐलक दीक्षा वैशाख माह संवत 2007 में आचार्य श्री 108 वीरसागर जी महाराज फुलेरा, राजस्थान में ग्रहण की।

मुनि दीक्षा
त्याग तप और संयम पथ की ओर बढ़ते हुए सर्वोत्कृष्ट पद आपकी मुनि दीक्षा कार्तिक शुक्ला चतुर्दशी संवत 2008 आचार्य श्री 108 वीरसागर जी महाराज द्वारा फुलेरा राजस्थान में हुई। और आपका नामकरण हुआ मुनि श्री 108 धर्म सागर जी महाराज

 

आचार्य पद

आपको फाल्गुन शुक्ल अष्टमी दिनाँक 24 फरवरी 1969 को तृतीय पट्टाधीश पद पर आचार्य श्री 108 धर्म सागर जी महाराज *स्थान* श्री महावीर जी, राजस्थान में सुशोभित किया गया।

विशेष बात

जिस दिन इन्हें आचार्य पद व तृतीय पट्टाधीश पद पर सुशोभित किया गया उसी दिन नूतन आचार्य श्री के कर कमलों से 11 दीक्षाएँ प्रदान की गई। वे 11दीक्षार्थी ये थे मुनिश्री105 महेंद्रसागर जी महाराज, मुनि श्री108 श्री अभिनंदनसागर जी महारा,मुनिश्री108संभवसागर जी महाराज, मुनिश्री 108 श्री शीतलसागर जी महाराज, मुनिश्री 108यतीन्द्र सागर जी महाराज, मुनिश्री 108 वर्द्धमान सागर जी महाराज, एवम आर्यिका 105 श्री गुणमति माताजी,आर्यिका 105श्री विद्यामति माताजी, साथ ही क्षुल्लक 105 श्री गुणसागर जी महाराज, क्षुल्लक 105श्री बुद्धि सागर जी महाराज के क्षुल्लिका 105 श्री अभयमति माताजी को दीक्षा प्रदान की।

संयम दीक्षाआचार्य श्री के कर कमलों से 76 दीक्षाये हुई। जिनमे वर्तमान में प्रमुख शिष्यों में वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज1969 श्री महावीर जी में दीक्षा प्रदान की गई थी।इसके साथ ही आर्यिका 105 श्री शुभमति माताजी जिनको सन 1972 अजमेर में आर्यिका दीक्षा प्रदान की गई थी। वर्तमान में माताजी वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर महाराज के संघ में हैं।, आर्यिका 105 श्री श्रुतमति माताजी जिन्हे सन 1974 दिल्ली में दीक्षा प्रदान की गई थी वर्तमान में 6 साधु विद्यमान है।मुनि दीक्षा 33पूज्य आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज जी ने 33 मुनि दीक्षा प्रदान की हैं। आर्यिका दीक्षा 21,ऐलक दीक्षा1,क्षुल्लक दीक्षा 17,क्षुल्लिका दीक्षा*05कुल 76संस्मरण1 अभिनंदन ग्रन्थ नही किया वरन फटकार लगाई।2 कंकड़ से माला फेरते थेमाला की को रखवाली करे।3 संवत 2018 शाहगढ़ mp चातुर्मास में मधु मक्खी के हमले का पूर्वाभास।4 सागर के निकट विश्राम स्थल पर सर्प पूरी रात्रि पटिये के नीचे रहा।5 संवत 2016 वीर गांव अजमेरमें श्रावक का दर्द आशीर्वाद से ठीक किया।6 धर्म के बिना ज्ञान की कोई कीई कीमत नही बिना ज्ञान के धर्म भी टिक नही सकता है।7 साधु के चार गुणइन्द्रिय आहार कषाय ओरनिंद्रा विजय8 आचार्य पद से साधु ही ठीकथे दिनभर नमोस्तु करने वालोको आशीर्वाद देने में समय हो जाता है सन 1975 सहारनपुरचातुर्मास में आजीवन ब्रह्मचर्यव्रत लेने वाले को पिच्छी लेनेदेने का सौभाग्य10 सिंह की दहाड़संवत 2075 बिजोलिया रास्तेमें नदी किनारे संघ का विश्रामनदी में पानी पीकर सिंह दहाड़कर चले गया11 चश्मे का भी परिग्रह नही12 सिंहासन पर नही बैठे।


☔☔ *चातुर्मास* 43
आपने क्षुल्लक अवस्था मुनि एवम् आचार्य रहते हुए अनेक सिद्ध एवम् अतिशय क्षेत्रो सहित अनेक नगरों में चातुर्मास किए है।समाधिएक ऐसे महामना भव्य पुण्यात्मा जिनका जन्म भी तथा समाधि भी तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर संयोग वश हुआ1008 श्री धर्म नाथ भगवान के केवलज्ञान कल्याणक दिवस होने से संयोग है कि दीक्षा के बाद नाम भी श्री धर्म सागर जी हुआवैशाख कृष्णा 9 नवमी विक्रम संवत 2044 सन 1987स्थान सीकर, राजस्थान में हुई।श्री मुनि सुब्रत नाथ भगवान का केवलज्ञान कल्याणक एक ऐसे महामना भव्य पुण्यात्मा जिनका जन्म तथा समाधि भी तीर्थंकर प्रभु के कल्याणक दिवस पर हुआ है। तृतीय पट्टाचार्य आचार्य श्री 108 धर्म सागर जी महाराज* के 111 वे अवतरण वर्ष पर कोटिशः नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु…धर्म प्रभावना हेतु आर्यिका 105 श्री महायशमती माताजी संघस्थ आचार्य श्री वर्धमान सागरसंकलनराजेश पंचोलिया इंदौर वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार

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