गुरु जो भी दे उसे स्वेच्छा से स्वीकार कर लेना चाहिए आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज
उज्जैन
श्री महावीर तपोभूमि उज्जैन विगत दो दिनों से गुरु शिष्य के समागम से ओत प्रोत है, पल है पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता आचार्य गुरुवर पुष्पदंत सागर महाराज एवम उन्हीं के ही शिष्य तपोभूमि प्रणेता आचार्य गुरुवर प्रज्ञासागर महाराज के समागम का।
वहा के क्षण बहुत ही अलौकिक नजर आ रहे हैं। शिष्य का गुरु के प्रति विनय भाव देखने को मिल रहा है जो अपने आप में एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। सही मायने में शिष्यतव की पहचान यही है।




रविवार की अनुपम बेला में पूज्य आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने गुरुदेव आचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज की आहार चर्या में सम्मिलित होकर आहारचर्या को संपन्न कराया यह क्षण देखते ही बन रहे थे।
रविवार की बेला में आचार्य गुरुवर पुष्पदंत सागर महाराज ने गुरु और शिष्य के विषय में प्रकाश डाला महाराज श्री ने कहा कि गुरु जो भी दे उसे स्वेच्छा से स्वीकार कर लेना चाहिए। हो सकता है, वह आपको अभी कठिन लगे, वह पल आपके लिए थोड़ा कठिन हो, लेकिन आगे जाकर वही आपको महान बनाता है।
उन्होंने कहा कि गुरु और शिष्य का रिश्ता पिता पुत्र के समान होता है। एक उदाहरण के माध्यम से बताया कि जिस प्रकार पिता अपने पुत्र को हाथ पकड़ कर चलना सिखाते है। इसी प्रकार गुरु अपनी शिष्य को धर्म के मार्ग पर चलना सिखाते है। यही शिष्य एक दिन जाकर भगवान बनने की राह पर चलता है। महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य ही भगवान बन सकता है। अपने आप को अच्छे कार्यों में लगाए और लोगों का भी भला करें आपकी हमेशा तरक्की होगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
