संतान कहे पिता जैसा चरित्र चाहिए, यही जीवन की असली वसीयत है : आचार्य पुलक सागर महाराज।
ओबरी
कस्बे में चल रहे पांच दिवसीय ज्ञान गंगा महोत्सव के चौथे दिन धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत आचार्य पुलक सागर महाराज ने कहा कि दुनिया में बाहर। इज्जत कमाना आसान है, लेकिन अपने ही घर में आदर्श बनना सबसे कठिन कार्य है। जिस दिनआपकी संतान धन के बजाय आपके जैसा चरित्र मांगे, समझ लेना आपने जीवन की सबसे बड़ी वसीयत कमा ली।
आचार्य श्री ने कहा कि। माता-पिता अक्सर धन की वसीयत छोड़ते हैं, जबकि संत केवल नसीहत देते हैं। यदि संतों की नसीहत को जीवन में उतार लिया। जाए, तो परमात्मा की वसीयत। अपने आप प्राप्त हो जाती है।
उन्होंने पारिवारिक कलह पर कड़वासच बोलते हुए कहा कि कई बार। बुजुर्ग बिना वसीयत किए संसार से चले जाते हैं, जिससे भाई-भाई में विवाद और जंग की स्थिति बन जाती है। ऐसे में आवश्यक है कि। व्यक्ति जीते-जी संपत्ति का न्यायपूर्ण बंटवारा कर दे। आचार्य श्री ने पति-पत्नी के संबंधों पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि पति की कमाई पर पहला अधिकार पत्नी का होना चाहिए, ताकि बुढ़ापे में उसे बच्चों के सामने हाथ न फैलाना पड़े। साथ ही उन्होंने कहा। कि बेटियों को अच्छे संस्कार देना माता-पिता का सबसे बड़ा धर्म है।
जैन धर्म पर बोलते हुए आचार्य श्री। ने कहा कि असली जैन की पहचान संयम और खान-पान की शुद्धता से होती है, न कि केवल बाहरी पहचान से
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312






