युवा पीढ़ी अपनी शक्ति धर्म और संस्कृति के संरक्षण में लगाए-आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराजरक्षण में लगाए-आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज
उदयपुर
हूमड़ भवन में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने आयोजित धर्म सभा में उपस्थित समस्त युवाओं से आह्वान किया कि युवाओं में बहुत बड़ी शक्ति होती है। अगर वह अपनी शक्ति का दर्शन प्रदर्शन समाज की धर्म संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में लगाएं तो हमारी संस्कृति को और ऊंचाइयां प्रदान कर सकते हैं। आचार्यश्री ने युवाओं से कहा कि वह अपनी शक्ति का उपयोग संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में कर सकते हैं और उस शक्ति का प्रतिफल हमारे संपूर्ण समाज को प्राप्त हो सकता है। युवा अपनी जिम्मेदारी को समझें और समाज में फैलती बुराइयों के प्रति सावधान रहें। यह युवाओं का ही दायित्व है कि समाज में इन फैलती बुराइयों को समय रहते खत्म करने का पुरुषार्थ करें।
आचार्यश्री ने धर्म सभा में उपस्थित संपूर्ण उदयपुर संभाग के युवाओं एवं संपूर्ण समाज से आह्वान किया कि अगले साल हमारे प्रथम आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के आचार्य पद के शताब्दी समारोह को अपनी संपूर्ण शक्ति और एकता के साथ एक महोत्सव के रूप में मनाएं। सभी जागृत होकर आज ही से यह कमर कस के तैयार हो जाएं तो पूरे देश में इस महोत्सव की सफलता गूंजेंगी।

आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि रात्रि को विवाह को वर्जित रखें और प्री वेडिंग शूटिंग नहीं होनी चाहिए भोजन की सामग्री सीमित मात्रा संख्या में होना चाहिए ।






आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज जी के शिष्य मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने उपदेश में कहा कि धार्मिक कार्य में युवाओं ने बढ चढ कर भाग लेना चाहिए । विगत 3 दिनों से चारित्र चक्रवर्ती ज्ञान वारिघि प्रतियोगिता में सभी उम्र के बालक,युवा, वृद्ध पुरुष , बालिकाओं महिलाओ ने उत्साह पूर्वक भाग लिया।इस प्रतियोगिता के माध्यम से प्रतिभागी और समाज को स्वाध्याय और प्रश्नोत्तरी से आचार्य श्री के जीवन की संयम यात्रा पढ़ने, सुनने,देखने का अवसर मिला। सभी को नियमित चारित्र चक्रवती ग्रंथ का परिवार में सामूहिक स्वाध्याय करने की प्रेरणा दी।

आचार्य श्री के सनावद स्कूल कालेज के सहपाठी दिलीप राजपाल का समाज द्वारा स्वागत किया गया।
राजेश पंचोलिया वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी के साथ
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
