संत के साथ चलना सौभाग्य की बात
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी महाराज धीरे धीरे पुण्योदय तीर्थ की ओर बढ़ रहें थे वे कंकरीले पथरीले उबड़ खाबड़ दुर्गम रास्ते जिन रास्तों पर पैदल चलना दुश्वार होता हैं उन्हें ऐसे पार कर रहें थे जैसे पक्की सड़क हो और उन रास्तों पर मात्र वे अकेले नही बल्कि पूरा गुना शहर था शहर का बच्चा बच्चा आज निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के पीछे पीछे दीवानों की तरह भागते नजर आया ,,,
एक युवक के पैर में कांटा चुभ गया उसके बाबजूद भी वह लंगड़ाते हुए साथ साथ चल रहा था आसपास के लोगों ने जब उससे कहा कि भैया पहिले कांटा निकाल लो फिर दौड़ कर आ जाना तो उसने जो उत्तर दिया लोगो के दिल को छू गया उसने कहा कि कांटे का क्या उसका दर्द तो दो दिन में ठीक हो जाएगा किन्तु वर्षो बाद जो मुनि श्रेष्ठ के साथ चलने का सौभाग्य मिल रहा है यदि आज एक पल भी चूक गया तो जिंदगी भर उसकी भरपाई नही हो पाएंगी,,, भगवान मेरे शहर आये और में उनके साथ चल भी न पाया
दीवानों की तरह चाहने वाले भक्तो की बदौलत ही निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी महाराज आज उम्र के 67 वर्ष में भी क्षमता से अधिक विहार और स्नेह की बारिश करते हैं वे सभी जगह भक्तों के दिल मे भगवान की तरह समाए हुए हैं उनका अपने गुरु भगवान के प्रति समर्पण ही भक्तो को उनके प्रति आकर्षित करता हैं उनका आशीर्वाद सदा बना रहे इसी मंगल भावना के साथ
श्रीश ललितपुर आलेख 9415597960
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312







