मुनि श्री सुधासागर महाराज तप कल्याणक पर देंगे जैनेश्वरी दीक्षा आज जन्मकल्याणक महोत्सव
गोलकोट गोलकोट में पंचकल्याणक महोत्सव की शुरुआत गर्भकल्याणक से हुई। भगवान के गर्भ में आने का दृश्य मंच पर दिखाया गया। माता मरु देवी के। 16 स्वप्नों का वर्णन महाराजा नाभिराय ने जनसमूह के सामने किया।
महाराज श्री ने स्वप्नों का फल बताते हुए कहा कि यह दृश्य गर्भकल्याण का सार्थक चित्रण है। ध्वजारोहण के साथ भगवान बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई। पांच दिन तक पंचकल्याणक महोत्सव चलेगा। मंच से पाषाण। से भगवान बनने की कला का चित्रण होगा।
धर्मसभा में मुनि पुंगव सुधा सागर महाराज ने कहा, जिस माता की कोख में तीर्थंकर आते हैं, वह धन्य हो जाती है।भगवान के माता-पिता को जीवन। में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।उन्होंने कहा, पुण्य उदय होते ही प्रभु के चरणों में भक्ति करनी चाहिए। यही मोक्ष का मार्ग है। रावण के पास धन, बुद्धि और बल था। उसने धन को अय्याशी में लगाया। बल का घमंड किया भगवान को कैलाश पर्वत सहित उठाने लगा। यही अहंकार उसे ले डूबा । इसलिए कभी अहंकार नकरें। यह उपदेश मुनि सुधा सागर महाराज ने धर्मसभा में दिया।
तपकल्याणक पर होगी मुनि पुंगव के कर कमलों से जैनेश्वरी दीक्षा
तपकल्याणक महोत्सव के दौरान महाराजा नाभिराय के दरबार होगा। तदोपरांत आदि कुमार का राज्याभिषेक होगा।इसके साथ ही विभिन्न देशों के राजाओं द्वारा भेंट समर्पित की जाएगी। राज्य व्यवस्था असि, मसि, कृषि, विद्या, वाणिज्य, शिल्प का उपदेश दिया जाएगा। राज्य व्यवस्था के साथ कृषि क्रिया कार्य,शिल्प कला का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा। इसकेबाद नीलाजंना नृत्य, नीलांजना का निधन का चित्रण होगा।
सब कुछ छोड़कर यदि जाएंगे तो आप भी सिद्ध बन सकते। हैं। महाराज श्री
महाराज श्री ने कहा सब कुछ छोड़कर यदि जाएंगे तो आप सिद्ध बन सकते हैं उन्होंने कहा कि सब कुछ छोड़कर यदि जाएंगे तो आप भी सिद्ध शिला को प्राप्त कर सकते हैं।जैसे तारा का समूह स्वच्छ जल में स्पष्ट दिखाई देता है, वैसे ही ज्ञानी को सब कुछ स्पष्ट दिखाई। देता है। भेद विज्ञान से ही आराधना का मार्ग। प्रशस्त होता है। पंच कल्याणक भाग्यवानों के लिए है। मंदिर भाग्यवानों के लिए है, भाग्यहीन के लिए नहीं है।
13 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद साकार हुआ पंचकल्याणक का संयोग
जैन दर्शन में पंचकल्याणक का। बड़ा महत्व है। गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान औरनिर्वाण इन पांच कल्याणक के माध्यम सेभगवान बनने की कला सिखाई जाती है। यह कला मानव जीवन के लिए बेहद सार्थक है। क्योंकि जीवन का आध्यात्मिक कल्याण हम कैसे कर सकते हैं, यह इस प्रक्रिया से साबित होता है। पिछले 13 वर्षों से पंचकल्याणक कीप्रतीक्षा यहां की जा रही थी और अब ऐसा संयोग आया है कि पंचकल्याणक के माध्यम तीर्थोदय गोलाकोट में पंचकल्याणक महामहोत्सव के तहत से वर्षों की प्रतीक्षा पूर्ण हो रही है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





